लेख
20-Feb-2026
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बीजिंग में आयोजित स्प्रिंग फेस्टिवल गाला के मंच पर जब इंसानों जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट बच्चों के साथ ताल मिलाकर नृत्य करने लगे और मार्शल आर्ट की सटीक मुद्राएं दिखाने लगे तो दुनिया भर की निगाहें चीन की ओर टिक गईं। तलवारों की चमक और बैकफ्लिप की फुर्ती के बीच एक भी रोबोट का न गिरना इस बात का संकेत था कि यह केवल मनोरंजन नहीं बल्कि तकनीकी परिपक्वता का सार्वजनिक प्रदर्शन था। यह वही मंच है जिसे चीन वर्षों से अपनी वैज्ञानिक और औद्योगिक उपलब्धियों के प्रदर्शन के लिए उपयोग करता रहा है। इस बार मंच पर रोशनी रोबोटिक्स पर थी और संदेश स्पष्ट था कि चीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालन की दौड़ में निर्णायक छलांग लगा चुका है। इन रोबोटों के पीछे खड़ी कंपनियों में ऊनीट्री जैसी उभरती तकनीकी शक्ति शामिल है जिसने कम समय में वैश्विक पहचान बनाई है। पिछले वर्ष तक जहां रोबोट साधारण गतिविधियां करते दिखाई देते थे वहीं इस बार उनकी चाल ढाल संतुलन और प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय सुधार दिखा। यह प्रगति केवल हार्डवेयर का परिणाम नहीं है बल्कि एआई सॉफ्टवेयर के तीव्र विकास का प्रमाण है। मशीन लर्निंग एल्गोरिदम और रीयल टाइम सेंसिंग ने रोबोटों को जटिल गतियों में भी संतुलित रहने योग्य बनाया है। यह संकेत देता है कि चीन अब रोबोट को केवल प्रदर्शन की वस्तु नहीं बल्कि उत्पादन और सेवा क्षेत्र के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में तैयार कर रहा है। चीन की रणनीति को समझने के लिए उसकी औद्योगिक नीति पर नजर डालनी होगी। बीजिंग ने एआई और रोबोटिक्स को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया है। यह पहल केवल तकनीकी प्रतिस्पर्धा का हिस्सा नहीं बल्कि जनसंख्या संरचना की चुनौती का समाधान भी है। चीन तेजी से बूढ़ी होती आबादी का सामना कर रहा है। श्रम शक्ति में गिरावट भविष्य की उत्पादन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में स्वचालन और ह्यूमनॉइड रोबोट फैक्ट्रियों खेतों और सेवा क्षेत्रों में मानव श्रम की कमी को पूरा करने के साधन के रूप में देखे जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य एआई प्लस मैन्युफैक्चरिंग मॉडल के माध्यम से उत्पादन दक्षता को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। वैश्विक परिदृश्य में यदि तुलना की जाए तो चीन का मुकाबला मुख्य रूप से अमेरिका और जापान से है। अमेरिका लंबे समय से सिलिकॉन वैली की नवाचार संस्कृति और निजी क्षेत्र की आक्रामक निवेश क्षमता के लिए जाना जाता है। टेसला के प्रमुख एलोन मस्क स्वयं एआई आधारित रोबोटिक्स को भविष्य का बड़ा क्षेत्र मानते हैं और चीनी कंपनियों को गंभीर प्रतिद्वंद्वी बताते हैं। जापान दशकों से औद्योगिक रोबोटिक्स का अग्रणी देश रहा है और उसकी मशीनें विश्व भर की फैक्ट्रियों में कार्यरत हैं। फिर भी हाल के वर्षों में ह्यूमनॉइड रोबोट के क्षेत्र में चीन की गति ने प्रतिस्पर्धा का समीकरण बदल दिया है। रिसर्च फर्मों के अनुमान बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर भेजे जा रहे ह्यूमनॉइड रोबोटों का बड़ा हिस्सा चीन में निर्मित है। यह केवल उत्पादन की मात्रा नहीं बल्कि लागत प्रभावशीलता और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती का परिणाम है। चीन के पास इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर बैटरी और मोटर निर्माण तक संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है। इससे उसे तेजी से प्रोटोटाइप विकसित करने और बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में सुविधा मिलती है। यही वह क्षमता है जिसने स्मार्टफोन और सौर पैनल जैसे क्षेत्रों में भी चीन को अग्रणी बनाया था और अब वही मॉडल रोबोटिक्स में दोहराया जा रहा है। चीन के विकास का प्रभाव एशिया और पश्चिम दोनों पर पड़ रहा है। दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देश जहां पहले से रोबोटिक्स में मजबूत थे अब उन्हें अधिक आक्रामक निवेश की आवश्यकता महसूस हो रही है। अमेरिका में भी एआई अनुसंधान और चिप निर्माण पर जोर बढ़ा है। यूरोप अपने विनिर्माण क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए स्वचालन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस प्रकार चीन का उभार वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा को नई गति दे रहा है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि रोबोटिक्स आने वाले दशक का वही क्षेत्र बन सकता है जो पिछली सदी में ऑटोमोबाइल उद्योग था। हालांकि इस विकास के साथ चिंताएं भी जुड़ी हैं। यदि रोबोट अधिक जटिल कार्य करने लगेंगे तो पारंपरिक नौकरियों पर प्रभाव पड़ सकता है। औद्योगिक मजदूरों से लेकर सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों तक कई वर्गों को पुनः कौशल विकास की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में ह्यूमनॉइड रोबोट उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। युद्ध और सुरक्षा के संदर्भ में भी इन तकनीकों के संभावित उपयोग पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस चल रही है। इसलिए तकनीकी प्रगति के साथ नैतिक और नीतिगत विमर्श भी आवश्यक है। चीन की खासियत केवल तकनीकी दक्षता नहीं बल्कि दीर्घकालिक दृष्टि है। वह चरणबद्ध तरीके से अनुसंधान उत्पादन और बाजार विस्तार को जोड़ता है। स्प्रिंग फेस्टिवल गाला जैसे मंचों पर सार्वजनिक प्रदर्शन से वह निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों को संदेश देता है कि भविष्य की दिशा स्पष्ट है। यह रणनीति अमेरिका की उद्यमशीलता संस्कृति से अलग है जहां नवाचार अक्सर निजी क्षेत्र की पहल से आगे बढ़ता है। चीन में राज्य और उद्योग के बीच समन्वय अधिक प्रत्यक्ष दिखाई देता है। इससे परियोजनाओं को तेज गति मिलती है और जोखिम साझा किया जाता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि चीन का आत्मविश्वास आक्रामक बयानबाजी से नहीं बल्कि परिणामों से झलकता है। वह तकनीक को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ता है परंतु वैश्विक बाजारों में भागीदारी भी चाहता है। उसकी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेती हैं और विदेशी निवेश आकर्षित करती हैं। इस संतुलन ने उसे विश्व आपूर्ति श्रृंखला का केंद्रीय खिलाड़ी बना दिया है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में चीन ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स के मानक तय करने की स्थिति में पहुंच सकता है। आज जब रोबोट मंच पर नृत्य कर रहे हैं तो यह केवल कला का प्रदर्शन नहीं बल्कि तकनीकी युग का संकेत है। चीन ने यह दिखाया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और यांत्रिक अभियांत्रिकी का संयोजन किस तरह वास्तविक दुनिया में लागू किया जा सकता है। अमेरिका और जापान अब भी शक्तिशाली प्रतिस्पर्धी हैं परंतु प्रतिस्पर्धा का संतुलन बदल रहा है। आने वाला समय बताएगा कि कौन सा मॉडल अधिक टिकाऊ सिद्ध होता है पर फिलहाल यह स्पष्ट है कि वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में चीन की भूमिका पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली हो चुकी है। (L 103 जलवन्त टाऊनशिप पूणा बॉम्बे मार्केट रोड, नियर नंदालय हवेली सूरत मो 99749 40324 वरिष्ठ पत्रकार साहित्ययकार स्तम्भकार) ईएमएस / 20 फरवरी 26