19-Feb-2026
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- चूहा कांड के बाद अब बिल्ली कांड से मचा हड़कंप इन्दौर (ईएमएस) मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, महाराजा यशवंतराव (एम वाय) अस्पताल में एक बार फिर सुरक्षा और स्वच्छता के दावों की पोल खुल गई है। कुछ महीने पहले हुए दिल दहला देने वाले चूहा कांड की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि अब अस्पताल की HIV यूनिट और ART सेंटर में बिल्लियों के डेरा जमाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (OPD) और HIV यूनिट जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र में एक बिल्ली ने तीन बच्चों को जन्म दिया और अब ये बिल्लियाँ न केवल वार्डों में खुलेआम घूम रही हैं, बल्कि उस दवा कक्ष तक भी पहुँच गई हैं जहाँ HIV संक्रमित मरीजों और बच्चों के लिए महत्वपूर्ण सेप्ट्रोन जैसी जीवनरक्षक दवाएं रखी जाती हैं। मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जहाँ इन बिल्लियों को वार्ड से तुरंत बाहर किया जाना चाहिए था, वहीं अस्पताल का कुछ स्टाफ ही उनकी देखभाल और उन्हें खाना खिलाता हुआ पाया गया। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि बिल्लियों की मौजूदगी से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है और दवाओं के दूषित होने की भी आशंका है। प्राप्त जानकारी अनुसार अस्पताल के सबसे संवेदनशीन HIV संक्रमण वार्ड में बिल्लियां खुलेआम घूमती नजर आ रही हैं. इतना ही नहीं, एचआईवी मरीजों के लिए बनाए गए मेडिसिन कक्ष में भी बिल्लियों के कारण गंदगी फैल रही है. यहां केंद्र सरकार द्वारा एचआईवी मरीजों को हर महीने हजारों रुपये की मुफ्त दवाओं का वितरण किया जाता है, लेकिन अव्यवस्था के चलते मरीजों को दी जाने वाली दवाओं के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि सितंबर 2025 में इसी अस्पताल के NICU (नर्सरी) वार्ड में चूहों ने दो नवजात बच्चों को बुरी तरह कुतर दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। उस समय हाईकोर्ट ने इसे घोर लापरवाही (Gross Negligence) करार देते हुए सरकार से जवाब माँगा था। और अस्पताल प्रबंधन ने पेस्ट कंट्रोल कंपनी एजाइल (Agile) का अनुबंध रद्द कर उन पर जुर्माना लगाया गया था। वहीं तत्कालीन विभागाध्यक्षों और नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया था। अब चूहा कांड के बाद एम वाय अस्पताल में सामने आए इस बिल्ली कांड मामले में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया का कहना है कि अस्पताल अधीक्षक से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने पुष्टि की कि दो बिल्ली के बच्चों को रेस्क्यू कर लिया गया है और तीसरे को पकड़ने के लिए नगर निगम या संबंधित टीम की मदद ली जा रही है। लाखों रुपये पेस्ट कंट्रोल और सुरक्षा पर खर्च करने के बावजूद, इंदौर जैसे स्वच्छता में नंबर-1 शहर के प्रमुख अस्पताल में जानवरों का इस तरह वार्डों तक पहुँचना सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। मरीजों के स्वास्थ्य के साथ हो रहा यह खिलवाड़ अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दे का रूप ले रहा है। आनंद पुरोहित/ 19 फरवरी 2026