राष्ट्रीय
22-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। योगासन ऐसी विधा है जो तन और मन दोनों को मजबूत बनाए रखने में मदद करती है। इन्हीं प्रभावी योगासनों में से एक है उत्थित पद्मासन, जिसे नियमित रूप से करने पर कई शारीरिक और मानसिक लाभ मिलते हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन के महत्व और इसके लाभों को विस्तार से साझा किया है। मंत्रालय का कहना है कि योग न केवल शरीर को अनुशासित बनाता है, बल्कि व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा को भी जगाता है। उत्थित पद्मासन इन्हीं में से एक ऐसा आसन है, जो शक्ति, संतुलन और एकाग्रता को एक साथ विकसित करता है। यह आसन पद्मासन की स्थिति में हाथों के सहारे पूरे शरीर को जमीन से ऊपर उठाने पर आधारित है। इसे करने के लिए सबसे पहले पद्मासन में बैठें, फिर हाथों को शरीर के पास जमीन पर रखें और गहरी सांस लेते हुए हथेलियों पर पूरा भार डालकर शरीर को ऊपर उठाएं। इस दौरान गर्दन को सीधा और नजरें सामने रखें। जितनी देर तक सहज रहें, उतनी देर इस मुद्रा में बने रहे और फिर धीरे-धीरे वापस पद्मासन में लौट आएं। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती दिनों में इसे कुछ सेकंड तक करना पर्याप्त है, बाद में अभ्यास बढ़ाया जा सकता है। उत्थित पद्मासन का नियमित अभ्यास हाथों, कंधों, कलाइयों और कोर मसल्स को मजबूत बनाता है। पेट की मांसपेशियां टोन होने से पाचन क्रिया सुधरती है और कब्ज जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है। शरीर का संतुलन बेहतर होता है और मानसिक एकाग्रता बढ़ती है, जिससे यह छात्रों और मानसिक रूप से सक्रिय रहने वालों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। यह तनाव कम करने में भी मदद करता है, क्योंकि इसके अभ्यास से मन स्थिर और शांत होता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन शरीर में प्राण ऊर्जा के प्रवाह को सुचारू करता है और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है। छाती, कंधों और हाथों में रक्त परिसंचरण भी तेज होता है, जिससे शरीर अधिक सक्रिय और ऊर्जावान महसूस करता है। सुदामा/ईएमएस 22 फरवरी 2026