राष्ट्रीय
22-Feb-2026


रांची(ईएमएस)। बढ़ते साइबर अपराध और उन पर लगाम लगाने के पुलिसिया दावों के बीच एक चौंकाने वाले आंकड़े ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 तक साइबर अपराध के कुल 3,804 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 3,057 अपराधियों को गिरफ्तार तो किया, लेकिन जब सजा दिलाने की बारी आई, तो पुलिस साक्ष्य जुटाने में कमजोर साबित हुई। इन गिरफ्तारियों के बावजूद अब तक महज 55 अपराधियों को ही दोषी सिद्ध किया जा सका है, जबकि 521 व्यक्तियों को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। इस गंभीर विसंगति को लेकर शनिवार को विधानसभा में झामुमो विधायक हेमलाल मुर्मू ने सरकार को घेरा। अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से उन्होंने पूछा कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारी के बाद भी लोग क्यों छूट रहे हैं? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पुलिस ठोस सबूत जुटाने में विफल रही है या फिर निर्दोष लोगों को पकड़कर आंकड़ों की बाजीगरी की जा रही है। विधायक ने पुलिस की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि साक्ष्य जुटाने में विफलता के कारण अपराधी बेखौफ हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्य योजना है। इसके जवाब में प्रभारी मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि सरकार साइबर अपराध को रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने दलील दी कि साइबर अपराध की जड़ें अक्सर विदेशों से जुड़ी होती हैं, जिससे जांच में जटिलताएं आती हैं। मंत्री ने बताया कि सभी साइबर थानों में प्रशिक्षित अधिकारियों की तैनाती की गई है और 95 प्रतिशत अपराधियों को पकड़ा जा चुका है। साथ ही, जन जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने एक अन्य उपलब्धि का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2024-25 में पुलिस ने अभियान चलाकर विभिन्न जिलों में 27,015 एकड़ जमीन पर लगी अफीम की खेती को नष्ट किया है। हालांकि, विधायक और विपक्षी दल साइबर मामलों में सजा की बेहद कम दर को लेकर संतुष्ट नजर नहीं आए। वीरेंद्र/ईएमएस/22फरवरी2026 -----------------------------------