रायपुर,(ईएमएस)। भारत जैसे भौगोलिक विविधताओं से भरे देश में विषमताएं विकास की राह में अक्सर चुनौती बनती रही हैं। पठारी और पाट क्षेत्रों से घिरे दूरस्थ गांव पेयजल की समस्या से जूझते रहे हैं। लेकिन अब केंद्र सरकार और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन से दूरस्थ व दुर्गम अंचलों में भी सभी घरों में नल से स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल पहुंच रहा है। कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 53 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम मांगामार की तस्वीर अब बदल चुकी है। ढाई हजार से अधिक की आबादी वाले इस गांव में जल जीवन मिशन के तहत एक करोड़ 45 लाख 34 हजार रुपए की लागत से रेट्रोफिटिंग योजना क्रियान्वित की गई है। योजना के तहत 40 किलोमीटर क्षमता की एक उच्च स्तरीय पानी टंकी स्थापित की गई है। गांव के हर एक घर में पेयजल पहुंचाने के लिए 3700 मीटर पाइपलाइन बिछाकर 522 घरों में नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। मांगामार की श्रीमती समारिन बाई खाण्डेल बताती है कि पहले पेयजल के लिए हैंडपंप, कुओं और अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता था। गर्मी के दिनों में भू-जल स्तर नीचे चला जाता था, जिससे पानी की किल्लत और भी बढ़ जाती थी। कई बार सुबह-सुबह पानी भरने के लिए लंबी कतारें लगती थीं। महिलाओं को घर के कामकाज के साथ पानी लाने घंटों मशक्कत करनी पड़ती थी। जल जीवन मिशन के तहत “हर घर जल” की सुविधा मिलने के बाद अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन पहुंच चुका है और नियमित रूप से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हो रही है। इससे न केवल जल संकट समाप्त हुआ है, बल्कि महिलाओं की दिनचर्या में भी सकारात्मक परिवर्तन आया है। अब महिलाओं को दूर-दूर तक पानी ढोने की मजबूरी नहीं रही। बचा हुआ समय वे परिवार, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आयवर्धक गतिविधियों में लगा रही हैं। स्वास्थ्य के स्तर पर भी सुधार देखने को मिल रहा है, क्योंकि स्वच्छ पेयजल से जलजनित बीमारियों का खतरा कम हो गया है। जल जीवन मिशन ने मांगामार जैसे सुदूर गांवों में जीवन की बुनियादी आवश्यकता पेयजल को घर-घर तक पहुंचाकर विकास की नई इबारत लिखी है। अब बारहों महीने ग्रामीणों को घर पर ही शुद्ध पानी उपलब्ध हो रहा है। हैंडपंपों पर निर्भरता समाप्त हो चुकी है और मांगामार जल संकट से मुक्त हो गया है। जल जीवन मिशन दूरस्थ क्षेत्रों में न केवल लोगों, खासकर महिलाओं का जीवन आसान बना रही है, बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में स्थायी सुधार भी ला रही है। सत्यप्रकाश/चंद्राकर/23 फरवरी 2026