क्षेत्रीय
23-Feb-2026
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सारंगपुर (ईएमएस)। आज से करीब 19 वर्ष पूर्व 26 सितंबर 2007 को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नगर आगमन पर 30 बिस्तर अस्पताल को 100 बिस्तर अस्पताल में उन्नयन करने की घोषणा की थी। इसके बाद जुलाई 2008 में मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 30 बिस्तर अस्पताल को उन्नत करते हुए 100 बिस्तर सिविल अस्पताल का दर्जा प्रदान किया था। लेकिन सिविल अस्पताल बनने के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी हालत में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आता। कहने को तो नगर में 100 बिस्तरों वाला शासकीय अस्पताल मौजूद है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। हालात यह हैं कि छोटी-छोटी घटनाओं और सामान्य बीमारियों के मरीजों को भी रैफर कर दिया जाता है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलती है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन और जेब दोनों पर भारी पड़ रही है। अस्पताल में स्वीकृत 100 बिस्तरों के बावजूद न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही विशेषज्ञ सेवाएँ उपलब्ध हैं। सर्जरी, स्त्री रोग, हड्डी रोग, एनेस्थीसिया जैसे विभाग कागजों में तो दर्ज हैं, लेकिन व्यवहार में या तो डॉक्टर पदस्थ नहीं हैं या नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते। परिणामस्वरूप सामान्य ऑपरेशन, डिलीवरी या फ्रैक्चर जैसे मामलों में भी मरीजों को जिला अस्पताल या निजी संस्थानों की ओर भेज दिया जाता है। इलाज का पर्याय बन चुका है ‘रेफर’ सारंगपुर सिविल अस्पताल में ‘रेफर’ शब्द अब इलाज का पर्याय बन चुका है। मामूली सड़क दुर्घटना हो या अन्य सामान्य बीमारियां—अधिकांश मामलों में मरीजों को शाजापुर सहित अन्य स्थानों पर रैफर कर दिया जाता है। एम्बुलेंस की कमी और समय पर सुविधा न मिलने से कई बार मरीजों की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती है, तो कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। 100 बिस्तर अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सों, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और वार्ड बॉय की भारी कमी है। गिने-चुने डॉक्टरों पर पूरे अस्पताल का बोझ डाल दिया गया है, जिससे न तो मरीजों को पर्याप्त समय मिल पाता है और न ही गुणवत्तापूर्ण इलाज। स्टाफ की भारी कमी, आधे से ज्यादा पद रिक्त मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2008 में 100 बिस्तर अस्पताल के लिए आदेश क्रमांक एफ/1-15/07/सत्रह/मेडिकल-3 के तहत निम्न पद स्वीकृत किए गए थे— विशेषज्ञ चिकित्सक मेडिकल विशेषज्ञ – 02 पद शल्य चिकित्सा (सर्जरी) विशेषज्ञ – 02 पद स्त्री रोग विशेषज्ञ – 02 पद हृदय रोग विशेषज्ञ – 02 पद निश्चेतना (एनेस्थीसिया) विशेषज्ञ – 01 पद नेत्र रोग विशेषज्ञ – 01 पद रेडियोलॉजिस्ट – 01 पद पैथोलॉजिस्ट – 01 पद अस्थि रोग विशेषज्ञ – 01 पद नाक, कान, गला विशेषज्ञ – 02 पद चिकित्सा एवं नर्सिंग स्टाफ मेडिकल ऑफिसर – 09 पद दंत चिकित्सक – 01 पद मेट्रन – 02 पद स्टाफ नर्स – 50 पद तकनीकी एवं सहायक स्टाफ नेत्र सहायक – 01 पद लैब टेक्नीशियन – 03 पद रेडियोग्राफर – 02 पद फार्मासिस्ट ग्रेड-2 – 05 पद लैबोरेटरी अटेंडेंट – 03 पद वार्ड बॉय – 05 पद ओटी अटेंडेंट – 03 पद ड्रेसर – 03 पद प्रशासनिक एवं अन्य कर्मचारी लेखापाल – 01 पद असिस्टेंट – 01 पद कंप्यूटर ऑपरेटर – 03 पद ड्राइवर – 02 पद किन्तु इतने वर्षों बाद भी इन पदों में से आधे से अधिक पद रिक्त पड़े हैं । नगरवासियों की मांग है कि शासन-प्रशासन तत्काल रिक्त पदों पर नियुक्तियां करे, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियमित पदस्थापना सुनिश्चित करे और अस्पताल को वास्तव में 100 बिस्तर की क्षमता के अनुरूप संचालित किया जाए, ताकि मरीजों को हर छोटी-बड़ी बीमारी के लिए बाहर दर-दर न भटकना पड़े। खाली पदो के लिए की जा रही है मांग अस्पताल मे खाली पदो के लिए आयुक्त स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराया जा चुका है । धीरे धीरे खाली पदो पर नियुक्तिया हो रही है। मनीष चौहान ,बीएमओ सारंगपुर नरेन्द्र जैन/ईएमएस/23/02/2026