:: कंकड़-पत्थरों के बीच पांच वर्षों की कठिन साधना पर निकले उदासीन संप्रदाय के युवा संत; नर्मदा संरक्षण और सनातन का दे रहे संदेश :: इंदौर/पीपरी (ईएमएस)। अथाह श्रद्धा, अटूट विश्वास और तन को तपा देने वाली साधना... माँ नर्मदा के तट पर इन दिनों भक्ति का एक ऐसा ही विरल स्वरूप देखने को मिल रहा है। जहाँ आम श्रद्धालु पैदल परिक्रमा कर रहे हैं, वहीं उदासीन संप्रदाय के संत स्वामी मंगल मुनि साष्टांग दंडवत (लेटकर) करते हुए नर्मदा मैया की परिक्रमा कर रहे हैं। सोमवार को अपनी इस दुर्गम यात्रा के साथ वे पीपरी-धाराजी पहुँचे, जहाँ उनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। :: 3850 किमी का लक्ष्य, डगमगाए नहीं कदम :: बोल बम कावड़ यात्रा मंडल के संयोजक गिरधर गुप्ता ने बताया कि संत मंगल मुनि केवल 31 वर्ष की अल्पायु में 3850 किलोमीटर लंबी नर्मदा परिक्रमा के कठिन संकल्प पर निकले हैं। यह यात्रा कोई सामान्य भ्रमण नहीं, बल्कि वर्षों तक चलने वाली वह साधना है जिसमें साधक प्रत्येक कदम पर जमीन पर लेटकर माँ नर्मदा को प्रणाम करता है और फिर उसी बिंदु से आगे बढ़ता है। चाहे चुभती धूप हो, मूसलाधार वर्षा या हाड़ कंपा देने वाली ठंड, उनकी यह अनवरत यात्रा न कभी रुकती है और न इसकी गति मंद पड़ती है। :: साढ़े चार सौ दिन और 1400 किमी का सफर :: संत मंगल मुनि ने अपनी इस यात्रा का श्रीगणेश 3 जून 2024 को ओंकारेश्वर से किया था। अब तक वे रत्नसागर और भरूच (गुजरात) होते हुए 1400 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। इस चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को पूर्ण करने में अभी लगभग 5 वर्ष का समय और लगेगा। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इतनी कठिन शारीरिक श्रम वाली यात्रा के बावजूद संत केवल एक समय ही अल्पाहार/भोजन ग्रहण करते हैं। :: युवा पीढ़ी को दे रहे हैं संस्कार की सीख :: अपनी इस यात्रा के माध्यम से युवा संत केवल धर्म का प्रचार नहीं कर रहे, बल्कि समाज को नर्मदा संरक्षण, स्वच्छता और पौधारोपण का जीवंत संदेश भी दे रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि देश की युवा पीढ़ी अपनी जीवनरेखा नर्मदा की महत्ता को समझे और सनातन धर्म के आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित हो। :: धाराजी में हुआ आत्मीय स्वागत :: रविवार को धाराजी आगमन पर नर्मदा मंदिर सनातन विचार मंच द्वारा संत का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर गिरधर गुप्ता, जगदीश विश्वकर्मा, गणेश सेन, रविन्द्र चौहान और संतोष चावड़ा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उनकी आरती उतारी। सोमवार सुबह उन्होंने धाराजी तट पर माँ नर्मदा का विधिवत पूजन-अर्चन कर अपनी आगे की यात्रा प्रारंभ की। प्रकाश/23 फरवरी 2026