ज़रा हटके
24-Feb-2026
...


नई दिल्ली (ईएमएस)। खाडी के देशों विशेषकर संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भारत में गोबर से बने उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। ऑर्गेनिक खेती के बढ़ते चलन, टिकाऊ कृषि तकनीकों की मांग और बायोगैस उत्पादन में बढ़ते उपयोग ने भारतीय गोबर उत्पादों की कीमतों में भी इजाफा किया है। वैश्विक स्तर पर गोबर आधारित उत्पादों का बाजार 2025 से 2032 के बीच करीब 6.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने का अनुमान है। वर्ष 2025 में यह बाजार 803.5 मिलियन डॉलर का था, जो 2032 तक बढ़कर 1,248.6 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत में कच्चे गोबर की कीमत आमतौर पर 30 से 50 रुपये प्रति किलो रहती है, जबकि खाड़ी देशों में इसके खरीदार 50 रुपये प्रति किलो तक भुगतान कर रहे हैं। प्रोसेसिंग और ट्रांसपोर्टेशन के कारण खुदरा और निर्यात कीमतें और बढ़ जाती हैं। गोबर खाद की कीमत पैकिंग और गुणवत्ता पर निर्भर करती है, जो 50 से 180 रुपये तक बेची जाती है, जबकि प्रीमियम पैक 200 रुपये तक पहुंच जाते हैं। वित्त वर्ष 2023–24 में भारत ने करीब 125 करोड़ रुपये का कच्चा गोबर और 173.7 करोड़ रुपये की गोबर आधारित खाद का निर्यात किया। कुल मिलाकर यह निर्यात 400 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जिसका प्रभाव घरेलू बाजार की कीमतों पर भी पड़ा है। बेंगलुरु सहित कई शहरों में ये उत्पाद इको-स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। विदेशी बाजारों में गोबर उत्पाद भारत की तुलना में 5 से 10 गुना अधिक दामों पर बिक रहे हैं, जिससे छोटे उद्यमियों में भी इस क्षेत्र को लेकर उत्साह बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल 50 हजार से 2 लाख रुपये के शुरुआती निवेश से यह कारोबार शुरू किया जा सकता है और उपयुक्त बाजार मिलने पर 50 हजार से 1 लाख रुपये तक मासिक कमाई संभव है। गोबर का उपयोग सिर्फ खाद तक सीमित नहीं है। इससे वर्मी कम्पोस्ट, बायो-लॉग्स, कागज, दीये और मूर्तियां भी बनाई जा रही हैं। संपीड़ित गोबर से बनी जलावन लकड़ी 10 से 15 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। पर्यावरण प्रेमियों के बीच ऐसे उत्पाद तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इसके अलावा बायोगैस उत्पादन से भी बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। राष्ट्रीय बायोगैस कार्यक्रम छोटे प्लांट पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी भी उपलब्ध कराता है। वैश्विक स्तर पर गोबर और खाद का बाजार 803.5 मिलियन डॉलर का आंका गया है और इसमें भारत आने वाले वर्षों में प्रमुख निर्यातक बना रह सकता है। उच्च गुणवत्ता वाली खाद की अंतरराष्ट्रीय कीमत 2026 तक 260 डॉलर प्रति मीट्रिक टन यानी 21–22 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लोकप्रियता के कारण आने वाले वर्षों में गोबर और खाद आधारित उद्योग के और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है। सुदामा/ईएमएस 24 फरवरी 2026