राष्ट्रीय
24-Feb-2026
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-गुजरात में स्थानीय विष से बनेगा एंटीवेनम गांधीनगर,(ईएमएस)। सर्पदंश से होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने की दिशा में भारत ने वैश्विक स्तर पर पहल करते हुए राष्ट्रीय कार्य योजना लागू की है। मार्च 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने ‘नेशनल एक्शन प्लान फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ स्नेकबाइट एन्वेनोमिंग (नेप-सी)’ लॉन्च किया था। भारत सर्पदंश एन्वेनोमिंग के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना लागू करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और दिव्यांगता में 50 प्रतिशत की कमी लाना है। इसी दिशा में गुजरात सरकार ने दक्षिण गुजरात के वलसाड जिले के धरमपुर में सर्प अनुसंधान केंद्र (एसआईआर) की स्थापना की है। यह केंद्र गुजरात फॉरेस्ट्री रिसर्च फाउंडेशन (जीएफआरएफ) के अधीन कार्य करता है, जो राज्य के वन एवं पर्यावरण विभाग के अंतर्गत स्वायत्त संस्था है। यहां वर्तमान में करीब 460 जहरीले सांप संरक्षित हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की गाइडलाइन के अनुरूप उनके विष का संग्रह और प्रसंस्करण किया जाता है। स्थानीय विष से तैयार होगा अधिक प्रभावी एंटीवेनम विशेषज्ञों के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों में सांप के विष की संरचना भिन्न हो सकती है, जिससे अन्य राज्यों के विष से बने एंटीवेनम की प्रभावशीलता कम हो जाती है। इसी चुनौती के समाधान के लिए गुजरात में पाए जाने वाले प्रमुख जहरीले सांपों—इंडियन कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल्स वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर—के विष से एंटीवेनम तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। केंद्र द्वारा की गई विष की ई-नीलामी हाल ही में केंद्र ने इन प्रजातियों के लायोफिलाइज्ड (पाउडर) विष की ई-नीलामी की। इंडियन कोबरा के विष का आधार मूल्य 40,000 रुपये प्रति ग्राम रखा गया था, जबकि नीलामी में 44,000 रुपये प्रति ग्राम प्राप्त हुए। इसी तरह सॉ-स्केल्ड वाइपर के लिए 50,000 रुपये के मुकाबले 56,500 रुपये प्रति ग्राम तक कीमत मिली। लाइसेंसधारी निर्माता इस विष से एंटीवेनम तैयार करेंगे, जिसे राज्य सरकार खरीदकर अस्पतालों में उपलब्ध कराएगी। प्रशिक्षण और जागरूकता पर भी जोर सर्प अनुसंधान केंद्र के उपाध्यक्ष डॉ. डी.सी. पटेल, जो पिछले 35 वर्षों से सर्पदंश उपचार में सक्रिय हैं, ने मीडिया को बताया, कि संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए उच्च गुणवत्ता वाले विष से तैयार एंटीवेनम अधिक कारगर साबित होगा। उन्होंने बताया कि अब तक 300 से अधिक स्थानीय स्नेक रेस्क्यूअर्स और 23 जिलों के लगभग 1,495 डॉक्टरों व मेडिकल अधिकारियों को सर्पदंश प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। केंद्र जागरूकता कार्यक्रम, शिक्षकों के प्रशिक्षण और पंचायतों के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में मिथकों को दूर करने का कार्य भी कर रहा है। संस्थान को विश्वस्तरीय बनाने के लिए 2.25 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है तथा 11.68 करोड़ रुपये के विकास प्रस्ताव पर विचार चल रहा है। हिदायत/ईएमएस 24 फरवरी 2026