राष्ट्रीय
24-Feb-2026
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-दिल्ली में बैठकर बटन दबाते ही दुश्मन के अंडरग्राउंड बंकर हो जाएंगे तबाह नई दिल्ली,(ईएमएस)। मॉडर्न एज वॉर में मिसाइल की भूमिका काफी अहम है। आज दुनिया के कई देशों के पास ऐसी कई मिसाइल्सम हैं, जो सैकडों टन विस्फोाटक लेकर हजारों किलोमीटर तक टारगेट पर अटैक कर सकती हैं। इन्हेंं इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी आईसीबीएम कहा जाता है। भारत ने अग्नि सीरीज के तहत इस तरह की मिसाइल डेवलप की है। अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल न्यू क्लियर वेपन ले जाने में सक्षम है। भारतीय डिफेंस साइंटिस्टी ऐसी मिसाइल डेवलप करने में जुटे हैं, जिसका इस्तेेमाल बंकर बस्टभर की तरह किया जा सके। बता दें अधिकांश देश अपने संवेदनशील सैन्यि ठिकानों और परमाणु बम बनाने वाले प्लांिट को जमीन के अंदर सुरक्षित कर रहे हैं। पिछले साल अमेरिका ने बंकर बस्टबर बम का इस्तेोमाल कर ईरान के ऐसे ही एक परमाणु ठिकाने को तबाह करने का दावा किया था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने किराना हिल्सन को टारगेट कर पाकिस्ताणन को तबाही का ट्रेलर दिखाया था। पाकिस्ता न का परमाणु ठिकाना किराना हिल्सा की पहाड़ियों में ही अंडरग्राउंड स्थित है। अब भारत को अपने मिसाइल बेड़े में ब्रह्मोस से भी खतरनाक मिसाइल एड करने का ऑफर मिला है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इजराइल ने भारत को बेहद खतरनाक और सामरिक रूप से अहम गोल्डीन होराइजन एयर लॉन्‍च्डा बैलिस्टिक मिसाइल का ऑफर दिया है। यह मिसाइल डीप स्ट्राडइक करने में सक्षम है। रेंज और स्पीइड के मामले में यह मिसाइल ब्रह्मोस से दो कदम आगे है। अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो भारत की स्ट्रैरटजिक स्ट्राइक कैपेबिलिटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह मिसाइल खास तौर पर गहरे और अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों पर हमला करने के लिए डिजाइन की गई बताई जा रही है। यह मिसाइल इजराइल की ‘सिल्वर स्पैरो’ टारगेट मिसाइल पर आधारित है, जिसकी लंबाई करीब आठ मीटर और वजन करीब तीन टन है। सिल्वर स्पैरो का इस्तेमाल पहले मिसाइल डिफेंस सिस्टम के ट्रायल के दौरान बैलिस्टिक खतरे की नकल करने के लिए किया जाता था। अब इसी तकनीक को ऑपरेशनल हथियार में बदलकर गोल्डन होराइजन को एक कॉम्बैट-रेडी डीप-स्ट्राइक सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक यह मिसाइल लड़ाकू विमानों से लॉन्च की जा सकती है और दुश्मन के सुरक्षित रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम होगी। हालांकि, इसकी आधिकारिक तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन विभिन्न रक्षा आकलनों के मुताबिक इसकी मारक क्षमता 1500 से 2000 किलोमीटर तक हो सकती है। कुछ अनुमान इसकी न्यूनतम प्रभावी रेंज लगभग 1000 किलोमीटर बताते हैं, जो पारंपरिक एयर लॉन्च्ड वेपन से काफी ज्यादा है। यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब इंडियान एयरफोर्स अपनी स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है। भारतीय वायुसेना युद्धक्षेत्र के सामरिक लक्ष्यों से लेकर लंबी दूरी के रणनीतिक ठिकानों तक अलग-अलग स्तर की मारक क्षमता विकसित करने पर जोर दे रही है। इजरायल पहले ही भारत को कई उन्नत मिसाइल सिस्टम उपलब्ध करा चुका है। इनमें एयर लोरा मिसाइल शामिल है, जिसकी मारक क्षमता करीब 400 किलोमीटर है, जबकि रैम्पेज एयर-टू-सर्फेस मिसाइल करीब 250 किलोमीटर तक हमला कर सकती है। ये दोनों मिसाइलें मुख्य रूप से रडार स्टेशन, एयर डिफेंस सिस्टम, हथियार भंडार और कमांड सेंटर जैसे सामरिक लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए डिजाइन की गई हैं, लेकिन गोल्डन होराइजन इनसे अलग श्रेणी का हथियार है। इसे खास तौर पर अंडरग्राउंड न्यू,क्लियर फैसिलिटी, मजबूत कमांड बंकर्स और कंक्रीट से सुरक्षित रणनीतिक ढांचों को नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है। सिराज/ईएमएस 24 फरवरी 2026