पुरानी परंपराएं ध्वस्त, हो रहे शुभकार्य जबलपुर, (ईएमएस)। मंगलवार 24 फरवरी से होलाष्टक प्रारंभ हो चुका है और इसके साथ ही वर्षों पुरानी परंपरा के तहत शुभ कार्यों पर रोक लग गई। आठ दिन तक चलने वाले होलाष्टक में शुभ कार्य नहीं किये जाते, लेकिन इस साल नई पीढ़ी पुरानी परंपरा को दरकिनार कर शादी विवाह सहित अन्य शुभ कार्य होलाष्टक में कर रहे है, दरअसल इसको लेकर भी पंडितों में मतभिन्नता आ गई हैं। पंचाग में भी होलाष्टक के दौरान 27 फरवरी तक विवाह सहित अन्य शुभकार्य के मुर्हूत निकाले गए हैं, लिहाजा सभी शुभ काम चल रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पी.एल. गौतमाचार्य के मुताबिक होलाष्टक का हफ्ता अशुभ माना जाता है। इस कारण इन आठ दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं। इस दौरान विवाह, चौक, मुण्डन, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार, नामकरण, सगाई आदि कुछ नहीं होता। वहीं नई वस्तुओं की खरीददारी और घर मकान खरीदने में कोई दोष नहीं होता। ये संस्कारों में नहीं आते। 27 फरवरी के बाद अब 4 मार्च से 25 मार्च तक पुन: विवाह के मुर्हूत शुरु होंगे। होलिका दहन 2 को ............ इस बार दो पूर्णिमा होने से दोज की तिथि एक दिन आगे बढ़ गई है| होलिका दहन 2 मार्च को ही होगा| इसी दिन व्रत की पूर्णिमा होगी और अगले दिन स्नानदान पूर्णिमा रहेगी| लिहाजा, 2 मार्च की रात्रि में 10.44 बजे होलिका दहन करने का मुर्हूत है| धुरेड़ी का पर्व 3 मार्च को मनाया जाएगा| सुनील साहू / मोनिका / 24 फरवरी 2026/ 05.58