राज्य
24-Feb-2026


- 9 लाख करोड़ के कर्ज में डूबी है राज्य सरकार - लोक लुभावन योजना पड़ रहा भारी मुंबई, (ईएमएस)। कहावत है आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया और यही कहावत चरितार्थ हो रही है महाराष्ट्र सरकार पर। जी हाँ, महाराष्ट्र सरकार का खजाना खाली हो गया है। आलम यह है कि ठेकेदारों का 77,000 करोड़ रुपये बकाया हो गया है है जिससे ठेकेदार भी हैरान परेशान नजर आ रहे हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस समय महाराष्ट्र सरकार 9 लाख करोड़ के कर्ज में डूबी हुई है। चुनाव के समय किए गए लोक लुभावन वादे को पूरा करने के लिए पैसे नहीं हैं और लोक लुभावन योजना सरकार के लिए भारी पड़ रहा है। सूत्रों की मानें तो कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए भी सरकार को कर्ज का ही आसरा है। जल्द ही राज्य का बजट पेश होने वाला है। बजट सत्र शुरू हो गया है। इस बीच, यह बात सामने आ रही है कि लाडली बहनों के लिए शुरू की गई योजना ने राज्य के खजाने को बड़ा झटका दिया है। सरकारी ठेकेदारों का 77,000 करोड़ रुपये तक का भुगतान अभी भी प्रलंबित है, और खजाने में पैसे की कमी के कारण सरकार द्वारा जारी किए गए चेक भी नहीं दिए जा रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार के खजाने में चल रही वित्तीय उथल-पुथल अब पूरे राज्य में विकास के कामों पर भारी पड़ रही है। फ़ंड की कमी से न सिर्फ़ पुराने पेमेंट रुके हुए हैं, बल्कि चल रहे विकास के काम भी रुक गए हैं। नए कामों को मंज़ूरी मिलने की रफ़्तार भी न के बराबर है। पिछले साल तक, ठेकेदारों का कुल बकाया लगभग 89,000 करोड़ रुपये था। काम के पैसे न मिलने के कारण कुछ ठेकेदार ने ख़ुदकुशी भी कर लिया था। इसके बाद ठेकेदारों और इंजीनियरों के बार-बार विरोध के बाद सरकार कुछ रकम देने के लिए मान गई थी। लेकिन, साल भर में सिर्फ़ 10 प्रतिशत रकम ही दी गई है। बाकी 77 हज़ार करोड़ के लिए ठेकेदार अभी भी सरकारी दफ़्तरों के दरवाज़े खटखटा रहे हैं। राज्य ठेकेदार संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिलिंद भोसले ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, कुछ विभागों ने ठेकेदारों को बकाया चेक दिए हैं, लेकिन जब ये चेक बैंक या ट्रेजरी में ले जाते हैं, तो उन्हें बताया जाता है कि वहाँ पैसे नहीं हैं। यह ठेकेदारों का मज़ाक उड़ाना है। संतोष झा- २४ फरवरी/२०२६/ईएमएस