क्षेत्रीय
24-Feb-2026


रांची(ईएमएस)। झारखंड के लोकतांत्रिक इतिहास को जब भी याद किया जाएगा, नगर निकाय चुनाव सबसे कुव्यवस्थित चुनाव के रूप में याद किया जाएगा। उक्त बातें रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने मंगलवार को अपना केंद्रीय कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कही। श्री सेठ नगर निगम चुनाव में कुव्यवस्था और साजिश को लेकर पत्रकारों से संवाद कर रहे थे।उन्होंने कहा कि प्रशासन की कुव्यवस्था और साजिश के कारण 50 हजार से अधिक लोगों का वोट प्रभावित हुआ है।एक ही परिवार का अलग-अलग वार्ड और अलग-अलग बूथों में मतदान केंद्र बनाया गया। एक ही मत पेटी में वार्ड पार्षद और महापौर का वैलेट पेपर डाला गया। स्टेशन रोड में रहने वाले सैकड़ो सिख बंधुओं का बूथ अचानक से बदलकर अंजुम इस्लामिया कर दिया गया, जिसके कारण बड़ी संख्या में हमारे सिख बंधु वोट देने से वंचित रह गए। कई लोग वोटर पर्ची लेकर जब बूथ पर पहुंचे तो उस बूथ पर उनका नाम ही नहीं था। अल्पसंख्यक इलाकों में मतदान करने गए लोगों की कोई जांच नहीं हुई। किसी बूथ पर ना तो सीसीटीवी कैमरा था, ना तो पुलिस प्रशासन की समुचित व्यवस्था थी। बुजुर्गों के लिए बूथों पर कोई भी विशेष व्यवस्था नहीं की गई। श्री सेठ ने कहा कि चुनाव कार्य में लगे राज्य के हजारों सरकारी कर्मचारी वोट डालने से वंचित रह गए। सबसे महत्वपूर्ण यह कि मतदान समाप्त होने के बाद फार्म 17 नहीं दिया गया, जो सबसे महत्वपूर्ण होता है।राष्ट्रीय स्तर पर लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में नोटा का प्रावधान होता है परंतु इस चुनाव से नोट को हटा दिया गया।उन्होंने कहा कि बैलट पेपर छापने में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। बड़ी संख्या में मतदाताओं को यह पता ही नहीं चल पाया कि मोहर कहां लगाना है। इसके चलते भी वोटिंग प्रभावित हुआ है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्षता पूर्वक जांच कराई जाए और जो भी इसके लिए दोषी हो, उस पर कठोर कार्रवाई किया जाए। लोकतंत्र का प्रदर्शन और वोटिंग के साथ मजाक सीधे-सीधे संविधान का अपमान है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब मतगणना की जो तैयारी चल रही है, उसे लेकर भी गड़बड़ी करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। मेरी शासन और प्रशासन के साथ ही निर्वाचन आयोग से भी यह मांग है कि सिर्फ जिला प्रशासन के भरोसे मतगणना को नहीं छोड़ा जाए। मतगणना का समय निश्चित नहीं करके लगातार मतगणना की जाए। 8 बजे रात में मतगणना बंद करने का कोई प्रावधान नहीं है। सीसीटीवी के साथ सुरक्षा के व्यापक इंतजाम हों। हर टेबल की वीडियोग्राफी सुनिश्चित की जाए। प्रत्याशी या उनके इलेक्शन एजेंट के बैठने की समुचित व्यवस्था हो। उच्च न्यायालय के आदेश से झारखंड में नगर निकाय के चुनाव हुए हैं। प्रशासन को यह समझ लेना चाहिए कि यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी हुई तो हम फिर से उच्च न्यायालय की शरण में जाएंगे। कर्मवीर सिंह/24फरवरी/26