राज्य
26-Feb-2026
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रायपुर (ईएमएस)। विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन आज शून्यकाल के दौरान धान खरीदी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने सरकार की धान खरीदी नीति को विफल बताते हुए इस पर विस्तार से चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया, जिसे सभापति ने अग्राह्य कर दिया। स्थगन प्रस्ताव खारिज होने के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी और गर्भगृह में पहुंच गए। हंगामे के बीच सदस्य स्वमेव निलंबित हो गए। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले दिन से ही किसानों को संदेह की नजर से देखा। टोकन व्यवस्था और रकबा समर्पण के नाम पर किसानों को परेशान किया गया। उनका कहना था कि कई किसानों का पूरा धान नहीं खरीदा गया और स्थिति अंग्रेजों के जमाने से भी बदतर रही। विधायक उमेश पटेल ने किसानों की कर्जमाफी की मांग उठाई। संगीता सिन्हा, राघवेंद्र सिंह, ब्यास कश्यप और द्वारिकाधीश यादव सहित कई विधायकों ने अलग-अलग जिलों—बालोद, जांजगीर, धमतरी, खैरागढ़, सिहावा और डोंगरगढ़—में किसानों को हुई परेशानियों का उल्लेख किया। विधायकों ने आरोप लगाया कि कई किसानों को धान बेचने के लिए धरना देना पड़ा, कुछ ने आत्महत्या की कोशिश की, तो कुछ को कथित रूप से पुलिस और प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार धान और किसान के मुद्दे पर चर्चा से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने किसानों के घरों और खलिहानों में जबरन प्रवेश किया और टोकन के नाम पर दबाव बनाया। भूपेश बघेल ने दावा किया कि उनके घर पर भी अधिकारी बलपूर्वक घुसे थे। उन्होंने कहा कि यदि चर्चा नहीं कराई जाती तो कम से कम सरकार को जवाब देना चाहिए। सभापति ने कहा कि बजट सत्र में आय-व्यय पर चर्चा प्राथमिकता होती है, इसलिए स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। स्थगन खारिज होने के बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन में नारेबाजी की और गर्भगृह में पहुंच गए, जिसके चलते वे स्वमेव निलंबित हो गए। सत्यप्रकाश/चंद्राकर/26 फरवरी 2026