राज्य
26-Feb-2026
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- स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विधायकों ने गिनाई खामियां भोपाल (ईएमएस)। विधानसभा में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विधायकों ने सरकार के सामने स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियां गिनाई। कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने यह भी कहा कि अस्पतालों में एंबुलेंस मौजूद है, लेकिन उसे चलाने के लिए ड्राइवर नहीं हैं और कई जगह डीजल के लिए भी पैसा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह शर्त रखनी चाहिए कि कोई भी व्यक्ति एमबीबीएस की डिग्री तभी प्राप्त कर सके जब वह कम से कम 2 साल ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करे। शेखावत ने आयुष्मान कार्ड से मिलने वाले इलाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीजों से पहले पैसा जमा कराने को कहा जाता है और बाद में आयुष्मान का पैसा आने पर राशि लौटाने का आश्वासन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पांच साल की ऑडिट कराने पर पूरी स्थिति सामने आ जाएगी। कफ सिरप से हुई मौतों का मामला उठाते हुए शेखावत ने कहा कि अवैध दवाइयां क्यों बिक रही हैं और इस तरह के कार्यों में रोक क्यों नहीं लगाई जा रही। उन्होंने कहा कि भले ही मंत्री का इस्तीफा मांगना उचित न हो, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी है कि इस पर रोक लगाई जाए और ऐसे मामलों को रोका जाए। डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में रुकना नहीं चाहते कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार को यह तय करना होगा कि डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में क्यों रुकना नहीं चाहते। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला व्यवस्था सुधारने में जुटे हैं, लेकिन जो माफिया सक्रिय हैं, उन पर लगाम लगाना जरूरी है। सरकार मेडिकल कॉलेज के भवन बना रही है, लेकिन डिप्टी सीएम यह समझें कि केवल भवन बनने से अस्पताल नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि पिछले 12 साल का रिकॉर्ड देखकर पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की स्थिति भी सामने आ जाएगी। नर्सिंग घोटाला पहले ही हो चुका है, और आज भी आधे से ज्यादा नर्सिंग कॉलेज न्यायालय के अधीन हैं। शेखावत ने कहा कि सरकार डॉक्टरों को वेतन नहीं दे पा रही है। अस्पतालों में मशीनें तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाले ऑपरेटर नहीं हैं। 6 करोड़ की मशीन 6 साल तक जंग खाती रही, क्योंकि ऑपरेटर नहीं था। आयुष्मान कार्ड का सही तरीके से उपयोग जरूरी विधायक चिटनीस ने कहा कि आयुष्मान कार्ड का सही तरीके से उपयोग जरूरी है। सरकार ने 94 प्रतिशत आयुष्मान कार्ड बनाए हैं और लोगों को उपचार उपलब्ध करा रही है, लेकिन कई मामलों में गड़बड़ी सामने आती है, इसलिए इसमें विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। भाजपा विधायक अर्चना चिटनीस ने सदन में प्रदेश में पेस्टिसाइड्स के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि कृषि विभाग के अधिकारियों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। विधायक ने चेताया कि यदि इस दिशा में उचित कदम नहीं उठाए गए, तो लोगों को भविष्य में गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने और प्रभावी कदम उठाने की मांग की। भाजपा विधायक अर्चना चिटनीस ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि जब सरकारी डॉक्टर बाहर जाकर गंभीर मरीजों का उपचार कर सकते हैं, तो प्राइवेट डॉक्टरों को भी सरकारी अस्पतालों में बुलाकर मरीजों का इलाज कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। हालांकि, इस व्यवस्था के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग जरूरी होगी। सरकार इस दिशा में विचार कर सकती है। विधायक चिटनीस ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी भी सदन में साझा की और उन्हें जनहित में उपयोगी बताया। सरकार दवाइयों की खरीदी में जिम्मेदार है कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार दवाइयों की खरीदी में जिम्मेदार है। छिंदवाड़ा में जहरीली सिरप बिकने और बच्चों की मौत होने की घटना के लिए सरकार जिम्मेदार है। इस पर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि यह दवा सरकार ने खरीदी नहीं थी। विधायक मरकाम ने कहा कि सरकार के पास ड्रग इंस्पेक्टर हैं और किसी भी दवा की बिक्री होने पर सरकार की जिम्मेदारी बनती है। मंत्री अपने कर्तव्यों से भाग नहीं सकते। मरकाम ने पब्लिक हेल्थ कॉरपोरेशन के माध्यम से दवा खरीदी में 20 से 30 प्रतिशत भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान योजना में बीमारी के टेस्ट का प्रावधान नहीं है, केवल इलाज का प्रावधान है। जो टेस्ट का खर्च होता है, वह मरीज या उनके परिजनों से लिया जाता है। इससे गरीब व्यक्ति टेस्ट रिपोर्ट में ही आर्थिक नुकसान उठाता है। मरकाम ने यह भी कहा कि राजस्थान के संजय नामक व्यक्ति पर फर्जी डिग्री के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी मध्यप्रदेश में कटनी समेत चार मेडिकल कॉलेज बनाने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई। विनोद / 26 फरवरी 26