क्षेत्रीय
26-Feb-2026
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बुरहानपुर (ईएमएस) । रमजान का पवित्र महीना इबादत, सब्र और रहमतों का महीना माना जाता है। इस मुकद्दस माह का पहला अशरा, जिसे रहमत का अशरा कहा जाता है, अब पूरा होने को है। इन दिनों रोजेदार इबादत में विशेष रूप से मशगूल है और अल्लाह की रहमतें पाने की दुआ कर रहा हैं। मस्जिदों में नमाजियों की संख्या बड़ी हुई है और हर ओर एक आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। रमजान में सहरी और इफ्तार का विशेष महत्व होता है। सहरी से रोजे की शुरुआत होती है, जबकि इफ्तार के समय रोजेदार पूरे दिन के सब्र के बाद रोजा खोलते हैं।जैसे-जैसे पहला अशरा समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, बाजारों में इफ्तार की तैयारियों को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजारों में खजूर, फल, शरबत, पकौड़े, समोसे और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है। रोजेदार अपने परिवार के साथ इफ्तार करने के लिए स्वादिष्ट और ताजगी भरी चीजें खरीद रहे हैं। बाजारों की रौनक देखते ही बनती है। चारों ओर रोशनी, सजावट और चहलपहल का माहौल है। दुकानदार भी पूरे उत्साह के साथ ग्राहकों की सेवा में लगे हुए हैं। बच्चों और युवाओं में भी खासा उत्साह दिखाई देता है। रमजान केवल इबादत का ही नहीं, बल्कि भाईचारे, मोहब्बत और साझा खुशियों का महीना है। यह महीना लोगों को जरूरतमंदों की मदद करने, जकात और सदका देने तथा आपसी सौहार्द बढ़ाने का संदेश देता है। पहला अशरा जहां रहमत का माना जाता है, वहीं आगे आने वाले अशरे मगफिरत और निजात की याद दिलाते हैं। इस तरह रमजान का हर दिन रौनक, बरकत और आध्यात्मिक सुकून से भरा हुआ है। आबिद अहमद/26फरवरी2026