27-Feb-2026


* रोग और कीट नियंत्रण हेतु समन्वित प्रबंधन अपनाने की किसानों को सलाह गांधीनगर (ईएमएस)| राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार सक्रिय है। ग्रीष्मकालीन बाजरा फसल को रोग एवं कीटों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कृषि निदेशक कार्यालय द्वारा विस्तृत मार्गदर्शिका जारी की गई है। इसमें समन्वित रोग-कीट प्रबंधन (आईपीएम) के तहत विभिन्न प्रभावी उपाय सुझाए गए हैं। * स्वस्थ बीज और रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन जरूरी मार्गदर्शिका के अनुसार किसानों को बाजरा की बुवाई के लिए स्वस्थ और रोगमुक्त बीज का चयन करना चाहिए तथा रोग प्रतिरोधी किस्मों की खेती करनी चाहिए। बीज दर 4 से 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखने की सलाह दी गई है। * अंतरवर्तीय फसल से कीट प्रकोप में कमी बाजरा के साथ मूंग की फसल 2:1 के अनुपात में लेने से तना मक्खी और बाल की इल्ली (गाभमार) के प्रकोप में उल्लेखनीय कमी आती है। साथ ही, प्रभावित पौधों को पारवणी के समय निकाल देना चाहिए। क्षेत्र में एक साथ बुवाई करने की भी सिफारिश की गई है, क्योंकि आगे-पीछे बुवाई करने से कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। * बीज उपचार से रोग नियंत्रण कुतुल रोग के नियंत्रण के लिए बीज को एप्रोन 35 एस.डी. 6 ग्राम प्रति किलोग्राम या रीडोमिल 8 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से उपचारित करना चाहिए। तना मक्खी और गाभमार इल्ली के नियंत्रण के लिए बुवाई के समय थायोमेथोक्साम 35 एफ.एस. 9 मि.ली. प्रति किलोग्राम या इमिडाक्लोप्रिड 600 एफ.एस. 9 मि.ली. प्रति किलोग्राम बीज उपचार आवश्यक बताया गया है। * जैविक और रासायनिक नियंत्रण के उपाय तना मक्खी के नियंत्रण के लिए निमार्क 30 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी या 0.05 प्रतिशत नीम तेल में 4 ग्राम साबुन प्रति लीटर पानी मिलाकर फसल उगने के बाद 10, 20 और 30 दिन पर तीन छिड़काव करने की सलाह दी गई है। जैविक खेती में फसल उगने के 20 और 40 दिन बाद ब्यूवेरीया बेसियाना 1.15 प्रतिशत डब्ल्यूपी 60 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी या 3 प्रतिशत पंचगव्य 300 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी के दो छिड़काव करने की अनुशंसा की गई है। इसके अतिरिक्त, तना मक्खी और गाभमार इल्ली के प्रभावी नियंत्रण के लिए कारटेप हाइड्रोक्लोराइड 50 एसपी 10 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी या थायोडिकार्ब 75 डब्ल्यूपी 2 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी के घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। * सावधानी बरतना अनिवार्य कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि दवाओं के उपयोग के समय लेबल पर दी गई अनुशंसित मात्रा और सावधानियों का पालन करना आवश्यक है। * अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें किसानों से अपील की गई है कि वे अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के ग्रामसेवक, विस्तार अधिकारी, कृषि अधिकारी, तालुका कार्यान्वयन अधिकारी, सहायक कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी, उप कृषि निदेशक (विस्तार) या उप कृषि निदेशक (प्रशिक्षण) से संपर्क करें। राज्य सरकार की इस पहल से किसानों को ग्रीष्मकालीन बाजरा फसल की बेहतर सुरक्षा और अधिक उत्पादन में मदद मिलने की उम्मीद है। सतीश/27 फरवरी