राष्ट्रीय
28-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। हैदराबाद के चम्पापेट के पास स्थित कर्मनघाट हनुमान मंदिर न केवल सबसे पुराने धार्मिक स्थलों में से एक है, बल्कि इसकी स्थापना और नामकरण से जुड़ी कथा भी बेहद रोमांचक है। इतिहासकारों के मुताबिक यह मंदिर करीब 800 साल पुराना है और इसका संबंध काकतीय वंश से जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि 12वीं शताब्दी में काकतीय राजा प्रोला द्वितीय ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर में भगवान हनुमान ध्यान मुद्रा में स्थापित हैं, जिन्हें अंजनेय स्वामी के रूप में पूजा जाता है। आमतौर पर हनुमान की वीर और पराक्रमी छवि देखी जाती है, लेकिन इस मंदिर में उनकी शांत और ध्यानमग्न प्रतिमा भक्तों को विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है। मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित कथा मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल की है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार 17वीं शताब्दी में जब औरंगजेब की सेना गोलकुंडा के बाद दक्षिण भारत के मंदिरों को निशाना बना रही थी, तब उनका ध्यान इस प्राचीन मंदिर पर भी गया। बताया जाता है कि जब सैनिक मंदिर को तोड़ने पहुंचे, तो वे मंदिर की दीवार के भीतर प्रवेश ही नहीं कर पाए। कई प्रयास असफल होने के बाद जब सैनिक हथौड़े लेकर दहलीज तक पहुंचे, तभी अचानक एक भयानक गर्जना सुनाई दी और सैनिक भय से कांप उठे। कहा जाता है कि उसी क्षण एक आकाशवाणी हुई “मंदिर तोड़ना है राजन तो कर मन कठोर”, यानी यदि मंदिर को नष्ट करना है तो पहले अपने मन को कठोर बनाओ। इस कथित चमत्कारिक घटना ने औरंगजेब को इतना भयभीत कर दिया कि उसने अपनी सेना के साथ मंदिर को छोड़ देना ही उचित समझा। इसी घटना के बाद इस स्थान का नाम ‘कर्मनघाट’ पड़ा, जिसका अर्थ है मन को कठोर बनाना। मंदिर से जुड़ा एक और पहलू श्रद्धालुओं की आस्था को और मजबूत करता है। यहां बड़ी संख्या में वे लोग पहुंचते हैं जो पुरानी बीमारियों, विशेषकर मधुमेह और मानसिक विकारों से राहत की कामना करते हैं। माना जाता है कि 40 दिनों तक यहां मंडल अनुष्ठान करने से स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। हालांकि इस विश्वास का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन भक्तों की आस्था इसे एक विशेष ऊर्जा केंद्र का रूप देती है। हर मंगलवार और शनिवार को मंदिर में हजारों की भीड़ उमड़ती है। सुदामा/ईएमएस 28 फरवरी 2026