* “विकसित गुजरात से विकसित भारत @2047” की दिशा में आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का संकल्प गांधीनगर (ईएमएस))| गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में आयोजित गुजरात सेमिकनेक्ट कॉन्फरेंस 2026 के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) नीति 2026–2031 की घोषणा की। इस नई नीति का उद्देश्य गुजरात को नवाचार आधारित और प्रौद्योगिकी में अग्रणी राज्य बनाना है। राज्य के सर्वांगीण विकास, उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता और समाज की प्रगति के लिए विज्ञान और तकनीक को सशक्त बनाना इस नीति का प्रमुख लक्ष्य है। “विकसित गुजरात से विकसित भारत @2047” के विज़न को साकार करने के लिए यह नीति राज्य को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने में सहायक होगी। गुजरात को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में रूपांतरित करने में यह नीति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। * रु. 1000 करोड़ का ‘स्वदेशी अनुसंधान फंड’ इस नीति का विशेष आकर्षण रु. 1000 करोड़ का “स्वदेशी अनुसंधान फंड” है। इसके माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, डिफेंस टेक्नोलॉजी, इमर्सिव टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलेगा। हर वर्ष 100 से अधिक गुणवत्तापूर्ण शोध परियोजनाओं को सहायता प्रदान की जाएगी। * राज्यव्यापी अनुसंधान और नवाचार क्लस्टर राज्य में गुजरात राज्य अनुसंधान और नवाचार क्लस्टर (जीआरआरआईसीओ) की स्थापना की जाएगी। इसकी शुरुआत गांधीनगर-अहमदाबाद क्षेत्र से होगी, जिसके बाद इसका विस्तार वडोदरा-सूरत तथा राजकोट-भावनगर-जूनागढ़-जामनगर तक किया जाएगा। अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, परीक्षण सुविधाएं और उद्योगों व शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इनोवेशन और आर एन्ड डी हब विकसित किए जाएंगे। * मानव संसाधन विकास पर विशेष जोर नीति के अंतर्गत 2030 तक 1 लाख कुशल शोधकर्ता तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रति वर्ष 250 जेआरएफ/एसआरएफ/पीडीएफ फेलोशिप प्रदान की जाएंगी। “वुमन इन इनोवेशन” फेलोशिप, एकीकृत गुजरात R&D पोर्टल और राज्यव्यापी एसटीईएम गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को शोध के लिए प्रेरित किया जाएगा। एसटीईएम लर्निंग सेंटर्स का विस्तार किया जाएगा तथा साइंस सिटी और जिला विज्ञान केंद्रों को अधिक सशक्त बनाया जाएगा। मोबाइल विज्ञान प्रयोगशालाओं के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक विज्ञान पहुंचाया जाएगा और अनुभव-आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। * बौद्धिक संपदा और निवेश में वृद्धि राज्य में 200 से अधिक आईपी सुविधा केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य है, जिससे हर वर्ष 1000 से अधिक बौद्धिक संपदा पंजीकरण, जिनमें कम से कम 500 पेटेंट शामिल होंगे, सुनिश्चित किए जा सकें। इससे उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग मजबूत होगा और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। 2030 तक एसटीआई क्षेत्र में व्यय को जीएसडीपी के 1% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। विभिन्न विभागों में 1% आर एन्ड डी आवंटन अनिवार्य किया जाएगा। सीएसआर के माध्यम से भी अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को सहयोग दिया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, गुजरात सरकार इस नीति के क्रियान्वयन के लिए नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा, जबकि गुजरात काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (जीयूजेसीओएसटी) कार्यान्वयन एजेंसी होगी। गुजरात स्टेट रिसर्च फाउंडेशन और विशेषज्ञों की तकनीकी समिति मार्गदर्शन प्रदान करेगी। गुजरात सेमिकनेक्ट कॉन्फरेंस 2026 के दौरान इस नीति की घोषणा राज्य की वैज्ञानिक प्रतिबद्धता और तकनीकी आत्मनिर्भरता के संकल्प का प्रतीक है। यह नीति गुजरात को नवाचार-आधारित और विश्वस्तरीय अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करेगी। सतीश/01 मार्च