ज़रा हटके
02-Mar-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। पिछले छह महीनों की खोज के दौरान अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मार्स रोवर क्यूरियोसिटी ने मंगल की सतह पर एक ऐसे विशेष क्षेत्र की पहचान की है, जहां जाल जैसी भू-आकृतियां दिखाई देती हैं। यह भू-आकृतियां संकेत देती हैं कि लाल ग्रह पर जीवन के अनुकूल स्थितियां हमारी पहले की कल्पना से कहीं अधिक लंबे समय तक बनी रही होंगी। यह खोज मंगल ग्रह के प्राचीन जल इतिहास और संभावित सूक्ष्मजीवी जीवन के अध्ययन में मील का पत्थर साबित हो सकती है। क्यूरियोसिटी द्वारा पहचाने गए इस क्षेत्र में जमीन पर कई किलोमीटर तक फैली हुई पतली, एक-दूसरे को काटती रिज देखने को मिलती हैं। अंतरिक्ष से देखने पर ये संरचनाएं किसी विशाल मकड़ी के जाल जैसी प्रतीत होती हैं। वैज्ञानिक इन्हें ‘बॉक्सवर्क’ नाम देते हैं। यह जालनुमा संरचना 3 से 6 फीट ऊंची पतली दीवारों से बनी होती है, जिनके बीच रेतीले गड्ढे मौजूद होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों साल पहले मंगल की सतह के नीचे बहने वाले जल ने चट्टानों की दरारों में खनिज जमा कर दिए थे। यह खनिज बाद में मजबूत हिस्से बन गए और समय के साथ तेज हवाओं ने कमजोर चट्टानों को घिसकर हटा दिया, जिसके बाद ये अनोखे पैटर्न उभरकर सामने आए। अमेरिका की राइस यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक टीना सीगर के अनुसार, माउंट शार्प की ऊपरी परतों में इन संरचनाओं का मिलना इस बात का संकेत हो सकता है कि प्राचीन काल में भूमिगत जलस्तर काफी ऊंचा रहा होगा। यदि ऐसा है तो इसका अर्थ यह है कि मंगल ग्रह पर तरल पानी हमारी सोच से कहीं अधिक समय तक मौजूद रहा, जो जीवन की संभावना को मजबूत करता है। माउंट शार्प लगभग 3 मील ऊंचा पर्वत है और इसकी हर परत मंगल के जलवायु इतिहास का अलग अध्याय बताती है। ऊपरी परतों में पानी के संकेत मिलना इस संभावना को फिर बल देता है कि रहने योग्य परिस्थितियां मंगल पर पहले सोची गई अवधि से अधिक समय तक बनी रहीं। कठिन इलाके से गुजरकर क्यूरियोसिटी ने न सिर्फ इन रिजों का अध्ययन किया, बल्कि इनके बीच मौजूद रेतीले हिस्सों में मटर के दाने जैसे छोटे-छोटे उभार भी खोजे, जिन्हें नोड्यूल कहा जाता है। प्रारंभिक विश्लेषण से पता चला है कि ये नोड्यूल भूमिगत जल के सूखने के बाद बचे खनिजों से बने हैं। चौंकाने वाली बात यह रही कि ये उभार रिज की गहरी दरारों के पास नहीं मिले, जिससे वैज्ञानिक मान रहे हैं कि खनिज बनने की प्रक्रिया कई चरणों में हुई होगी। साथ ही चट्टानों के नमूनों में क्ले और कार्बोनेट खनिजों की मौजूदगी मिली है, जो प्राचीन जल गतिविधियों का मजबूत प्रमाण माने जाते हैं। क्यूरियोसिटी ने हाल में ‘वेट केमिस्ट्री’ तकनीक से चट्टानों में कार्बन आधारित अणुओं की खोज भी की है, जो जीवन की संरचना में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज मंगल पर जीवन का पक्का सबूत नहीं है। सुदामा/ईएमएस 02 मार्च 2026