-ऐतिहासिक मुकदमा जिस पर टिकी वैश्विक नजर लॉस एंजिल्स,(ईएमएस)। सोशल मीडिया ऐप से थोड़ी देर दूर होते ही लगता था कि मैं कुछ बहुत बड़ा मिस कर रही हूं। यह बयान 20 वर्षीय कैली जीएम का है, जिसने यूट्यूब और इंस्ट्राग्राम के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। लॉस एंजिल्स की अदालत में सोशल मीडिया लत से जुड़े इस अहम मामले में गुरुवार को कैली ने गवाही दी थी, जिसने कोर्ट-रुम को भावुक कर दिया। कैली ने बताया कि महज छह साल की उम्र में वह यूट्यूब के जरिए डिजिटल दुनिया से जुड़ीं और धीरे-धीरे यह जुड़ाव लत में बदल गया। किशोरावस्था तक आते-आते वह इंस्टाग्राम पर रोजाना कई-कई घंटे बिताने लगीं। उनके मुताबिक, एक समय ऐसा था जब वह 16 घंटे तक लगातार ऑनलाइन रहती थीं। उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी मां रात में उनका फोन लिविंग रूम में रखवा देती थीं, लेकिन वह चुपके से उठाकर फिर इस्तेमाल करने लगती थीं। उन्होंने कहा, मुझे लगता था कि अगर मैं ऑनलाइन नहीं रही तो कुछ बहुत महत्वपूर्ण छूट जाएगा। कैली के अनुसार, इस लत का असर उनकी पढ़ाई, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि सोशल मीडिया पर अपनी छवि को लेकर वह लगातार तनाव में रहती थीं। बचपन से ही इंस्टाग्राम के ‘फिल्टर्स’ का इस्तेमाल करते हुए वह अपनी आंखों को बड़ा और कानों को छोटा दिखाने की कोशिश करती थीं। उन्होंने कहा, मुझे लगता था कि असली मैं पर्याप्त नहीं हूं। यह मुकदमा केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसका असर उन हजारों मामलों पर पड़ सकता है, जिनमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को युवाओं में अवसाद, एंग्जायटी, ईटिंग डिसऑर्डर और आत्मघाती प्रवृत्तियों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। वहीं, प्रतिवादी कंपनियों की ओर से दलील दी गई कि कैली की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के पीछे पारिवारिक परिस्थितियां जिम्मेदार थीं, न कि प्लेटफॉर्म्स की संरचना। कंपनियों का तर्क है कि वे सुरक्षित उपयोग के लिए गाइडलाइन और पैरेंटल कंट्रोल जैसे फीचर उपलब्ध कराती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस डिजिटल युग में बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर नीतिगत बहस को नई दिशा दे सकता है। अदालत का फैसला चाहे जो भी हो, कैली की गवाही ने सोशल मीडिया के प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हिदायत/ईएमएस 02 मार्च 2026