लेख
03-Mar-2026
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(4 मार्च राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस) भारत में प्रत्येक वर्ष 4 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। यह दिवस केवल एक तिथि नहीं बल्कि जागरूकता जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का प्रतीक है। इसी दिन वर्ष 1966 में नेशनल सेफ्टी काउंसिल की स्थापना की गई थी। वर्ष 1972 से इस दिवस को संगठित रूप में मनाया जाने लगा और तब से यह 4 मार्च से 10 मार्च तक राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह के रूप में निरंतर आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य कार्यस्थलों सड़कों घरों और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना तथा सुरक्षा स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना है। राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस का इतिहास उस दौर से जुड़ा है जब देश में औद्योगिक विकास तेजी से हो रहा था और इसके साथ दुर्घटनाओं की संख्या भी बढ़ रही थी। श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई और एक ऐसी संस्था की आवश्यकता महसूस हुई जो सुरक्षा प्रशिक्षण जागरूकता और मार्गदर्शन का कार्य कर सके। इसी सोच के परिणामस्वरूप राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की स्थापना की गई। परिषद ने यह संकल्प लिया कि उद्योगों के साथ साथ समाज के प्रत्येक वर्ग तक सुरक्षा का संदेश पहुंचाया जाएगा। कुछ वर्षों बाद इस स्थापना दिवस को राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया ताकि सुरक्षा का संदेश व्यापक स्तर पर फैल सके। इस दिवस का मूल उद्देश्य लोगों में सुरक्षा के प्रति सजगता उत्पन्न करना है। कार्यस्थल पर छोटी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। यदि श्रमिक उचित सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग न करें या प्रबंधन आवश्यक सावधानियां न बरते तो परिणाम दुखद हो सकते हैं। इसलिए यह दिवस नियोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों को उनकी जिम्मेदारियों का स्मरण कराता है। सुरक्षा केवल नियमों का पालन भर नहीं बल्कि एक सकारात्मक कार्य संस्कृति का निर्माण है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को और दूसरों को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हो। राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह के दौरान विभिन्न उद्योगों विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सुरक्षा शपथ दिलाई जाती है प्रशिक्षण सत्र आयोजित होते हैं और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं बल्कि व्यवहार में परिवर्तन लाना है। जब व्यक्ति स्वयं यह समझने लगता है कि उसकी सावधानी किसी का जीवन बचा सकती है तब सुरक्षा संस्कृति मजबूत होती है। प्रत्येक वर्ष इस दिवस के लिए एक विषय निर्धारित किया जाता है। वर्ष 2025 का विषय विकसित भारत के लिए सुरक्षा और कल्याण महत्वपूर्ण था। यह विषय स्पष्ट करता है कि राष्ट्र का विकास तभी संभव है जब उसके नागरिक सुरक्षित हों। आर्थिक प्रगति औद्योगिक विस्तार और सामाजिक उन्नति का कोई अर्थ नहीं यदि मानव जीवन असुरक्षित हो। इसलिए सुरक्षा को विकास की आधारशिला माना जाना चाहिए। सड़क सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस की भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रतिदिन होने वाली दुर्घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम सच में सावधान हैं। वाहन चलाते समय नियमों का पालन करना सीट बेल्ट लगाना गति सीमा का ध्यान रखना और नशे की अवस्था में वाहन न चलाना जैसे सरल उपाय अनेक जीवन बचा सकते हैं। जब हम स्वयं नियमों का पालन करते हैं और दूसरों को भी प्रेरित करते हैं तभी सच्चे अर्थों में सुरक्षा के प्रति समर्पण दिखाई देता है। स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में आपातकालीन सेवाओं की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिकीजा हैल्थकेयर लिमिटेड ने विभिन्न राज्यों में एक सौ आठ एम्बुलेंस सेवाओं के माध्यम से लाखों लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता प्रदान की है। राजस्थान सहित पंजाब मध्य प्रदेश ओडिशा झारखंड और सिक्किम में इन सेवाओं ने अनगिनत जीवन बचाए हैं। कठिन परिस्थितियों और महामारी के समय भी इन सेवाओं ने निरंतर कार्य कर समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की है। यह उदाहरण बताता है कि सुरक्षा केवल जागरूकता तक सीमित नहीं बल्कि सेवा और समर्पण से जुड़ी हुई है। राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस के प्रति हमारा समर्पण कैसा होना चाहिए ,यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है। समर्पण का अर्थ केवल एक दिन कार्यक्रम में भाग लेना नहीं बल्कि वर्ष भर सावधानी और जिम्मेदारी निभाना है। हमें अपने घर से ही सुरक्षा की शुरुआत करनी चाहिए। रसोई गैस की नियमित जांच करना विद्युत उपकरणों का सही उपयोग करना बच्चों को आग और सड़क से संबंधित सावधानियां सिखाना और पर्यावरण की रक्षा करना हमारे दैनिक जीवन के छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम हैं। कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों का पालन करना और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना हमारे समर्पण का प्रमाण है। सुरक्षा के प्रति समर्पण भाव का संबंध मानवीय संवेदनाओं से भी है। जब हम यह समझते हैं कि हमारी लापरवाही से किसी परिवार का भविष्य प्रभावित हो सकता है तब हम अधिक सजग हो जाते हैं। सुरक्षा को आदत बनाना ही इस दिवस का वास्तविक संदेश है। यदि प्रत्येक नागरिक स्वयं को जिम्मेदार माने और सतर्क व्यवहार अपनाए तो दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। विद्यालयों में बच्चों को प्रारंभ से ही सुरक्षा के महत्व के बारे में शिक्षा दी जानी चाहिए। नई पीढ़ी यदि सुरक्षा संस्कृति को अपनाएगी तो भविष्य अधिक सुरक्षित होगा। उद्योगों में नियमित प्रशिक्षण और सुरक्षा अभ्यास कर्मचारियों को सक्षम बनाते हैं। समाज में जागरूकता अभियान लोगों को यह संदेश देते हैं कि सुरक्षा बोझ नहीं बल्कि जीवन रक्षा का माध्यम है। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद एक गैर लाभकारी संस्था के रूप में आधी सदी से अधिक समय से कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य सुरक्षा प्रशिक्षण को सभी के लिए सुलभ बनाना और समाज में सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करना है। इस संस्था द्वारा प्रारंभ किया गया राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस आज एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। यह हमें वर्ष में एक बार रुककर यह सोचने का अवसर देता है कि हमने सुरक्षा के क्षेत्र में क्या प्रगति की और आगे क्या करना शेष है। अंततः राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि सुरक्षित जीवन ही सशक्त राष्ट्र की पहचान है। विकास और सुरक्षा साथ साथ चलें तभी राष्ट्र समृद्ध और स्थिर बन सकता है। हमें इस दिवस को औपचारिकता न मानकर जीवन का संकल्प बनाना चाहिए। जब प्रत्येक व्यक्ति सुरक्षा के प्रति समर्पित होगा तभी एक ऐसा भारत निर्मित होगा जहां प्रत्येक नागरिक निडर होकर जीवन जी सके। यही राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस का वास्तविक उद्देश्य है और यही हमारे सच्चे समर्पण की अभिव्यक्ति भी है। (वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार स्तम्भकार) (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 3 मार्च /2026