वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के परसेवरेंस रोवर द्वारा भेजी गई ताज़ा तस्वीरों ने एक बार फिर मंगल ग्रह की प्राचीन पहेलियों को चर्चा में ला दिया है। मंगल ग्रह की धूल भरी सतह के बीच रोवर की कैमरे में एक छोटा-सा काले और सफेद धारियों वाला पत्थर कैद हुआ है जो नासा के वैज्ञानिकों को हैरान कर रहा है। ‘जेबरा रॉक’ के नाम से इंटरनेट पर वायरल हो चुका यह पत्थर आकार में लगभग 20 सेंटीमीटर का है, लेकिन इसकी अनोखी बनावट इसे बेहद खास बनाती है। नासा ने इसे आधिकारिक तौर पर ‘फ्रेया कैसल’ नाम दिया है, और माना जा रहा है कि यह मंगल के भूगर्भीय इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है। जहां मंगल की चट्टानें आमतौर पर लाल और भूरे रंग की दिखाई देती हैं, वहीं यह ब्लैक-एंड-व्हाइट पत्थर दूर से ही अलग नज़र आता है। इसकी धारियां इतनी स्पष्ट हैं कि इसे देखकर पृथ्वी पर पाए जाने वाले कुछ विशिष्ट कायांतरित पत्थरों की याद आती है। इसकी खोज जेजेरो क्रेटर इलाके में हुई है, जो अरबों वर्ष पहले एक विशाल झील हुआ करता था। परसेवरेंस रोवर इन दिनों इसी क्रेटर के किनारों और ढलानों पर चढ़ाई करते हुए अध्ययन कर रहा है, और उसी दौरान उसे यह अनोखा पत्थर मिला। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरह की धारियों के बनने के पीछे दो प्रमुख भूगर्भीय प्रक्रियाओं की भूमिका हो सकती है। पहली है आग्नेय प्रक्रिया, जिसमें ज्वालामुखीय लावा धीरे-धीरे ठंडा होने पर अलग-अलग खनिजों की परतों में बंट जाता है और पत्थर पर धारियां बन जाती हैं। दूसरी प्रक्रिया कायांतरित परिवर्तन की है, जिसमें अत्यधिक गर्मी और दबाव के कारण चट्टानों की बनावट बदलती है और वह परतदार रूप में दिखाई देती हैं। पृथ्वी पर भी ऐसे पत्थर बड़ी गहराइयों और अत्यधिक दबाव वाली जगहों पर पाए जाते हैं। मगर वैज्ञानिकों को असली हैरानी इस बात की है कि यह पत्थर अपने आसपास की किसी भी चट्टान से मेल नहीं खाता। यह किसी बड़े पत्थर का हिस्सा भी नहीं है, बल्कि ढलानों से लुढ़क कर नीचे आया एक अलग-थलग पत्थर प्रतीत होता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि इसकी उत्पत्ति जेजेरो क्रेटर के ऊपरी क्षेत्रों में हुई है, जहाँ अब तक रोवर नहीं पहुंचा है। इससे वैज्ञानिकों में यह उत्सुकता बढ़ गई है कि जैसे-जैसे रोवर ऊपर चढ़ेगा, वह शायद इस ‘जेबरा रॉक’ का वास्तविक स्रोत या उससे मिलती-जुलती प्राचीन चट्टानें खोज सकेगा। यह छोटा-सा लेकिन बेहद अनोखा पत्थर मंगल के भूगर्भीय इतिहास की गहराइयों से जुड़े संकेत दे सकता है। सुदामा/ईएमएस 03 मार्च 2026