नई दिल्ली (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ निवास के कैंटीन मालिक अनरूप गुप्ता (48) की हत्या की इस वारदात को सुलझाने के दौरान और उसके बाद आरोपियों से जब पुलिस की पूछताछ हुई तो कई अहम जानकारी पुलिस को मिली। पता चला अनरूप गुप्ता गोल्ड जूलरी पहनने के काफी शौकीन तो थे ही वह परिवार से अलग द्वारका के फ्लैट में कुछ समय से रहते थे। तीन भाई और बहन में वह सबसे बड़े थे। लेकिन भाइयों से बातचीत नहीं होती थी, सिर्फ उत्तम नगर में रहने वाली बहन से उनकी बात होती थी और कभी आते जाते भी थे। मुख्य आरोपी हैप्पी से उनकी 1 साल के अंदर इतनी गहरी दोस्ती हो गई थी कि वह अनरूप के बिजनेस से लेकर फैमिली तक के बारे में सब कुछ जान चुका था। उसे लगा कि जो शख्स द्वारका के फ्लैट में रहते हैं, कैंटीन चलाते हैं, लाखों की जूलरी पहनते हैं। उनके पास काफी पैसा होगा यदि इनको किडनैप किया जाए तो कम से कम 1 करोड़ रुपए तो हाथ लग ही सकता है। इसी बड़ी लालच के कारण हैप्पी ने सबको अपने साथ मिला लिया था। कुछ दिन पहले ही हैप्पी के घर में बेटी का जन्म हुआ था। जिसकी एक खुशी में उसने अनरूप को पार्टी देने की बात कही और 18 फरवरी को उसने पार्टी का बहाना बनाकर मटियाला में अनुरूप को बुलाया था। लेकिन अनरूप तंग गलियों में गाड़ी से जाने की बजाय गाड़ी छत्तीसगढ़ निवास में खड़ी करके बाइक टैक्सी बुलाकर मटियाला के उस बिल्डिंग में पहुंच गए जहां पार्टी के लिए बुलाया गया था। वही बाइक टैक्सी की डीटेल पुलिस के लिए सबसे अहम कड़ी बनी आरोपियों के ठिकाने तक पहुंचने में। पुलिस को यह भी पता चला कि जब अनरूप उस बिल्डिंग में पहुंचे तो सिर्फ हैप्पी की गर्लफ्रेंड राखी उस समय मौजूद थी। जब यह अंदर पहुंचे तो बाकी चार आरोपी पहुंचकर अनरूप को पकड़ लिया। हाथ पैर बांध दिया और उनकी पिटाई कर दी। पैसे की डिमांड करने लगे, जिसको लेकर वह मना करते रहे। रात में उनको कमरे में बंद कर दिया और ठंड से बचने के लिए रजाई डालकर सोने के लिए छोड़ दिया, की सुबह देखेंगे। अनरूप रजाई के अंदर ही कोशिश करते रहे और उन्होंने हाथ खोलने में कामयाब हुए। उसके बाद उन्होंने फिर बंधा हुआ पैर खोल लिया। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/03/मार्च/2026