वाशिंगटन (ईएमएस)। बोस्टन की 1770 मार्च की एक ठंडी रात में कुछ नाराज नौजवानों ने अकेले खड़े एक ब्रिटिश संतरी पर बर्फ के गोले फेंके है। उसके बाद जो हुआ वह इतिहास है। क्योंकि, यहीं से अमेरिका की क्रांति की आग भड़की थी और घटना ने चिंगारी का काम किया था। इतिहास में यह घटना बोस्टन नरसंहार के नाम से जानी जाती है। इसके बाद से ही अंग्रेजों का खुला विरोध शुरू हुआ था। मैसाचुसेट्स के बोस्टन शहर में काफी बर्फबारी हुई थी। सड़के सफेद चादर से ढंकी हुई थी और लोगों के मन में इसका गुस्सा भरा था कि उनके शहर पर अंग्रेजों ने कब्जा किया था। रात 8 बजे के करीब शहर के किंग स्ट्रीट पर कस्टम हाउस के पास से कुछ लोकल युवक गुजर रहे थे। तभी उनकी नजर वहां पहरा दे रहे एक ब्रिटिश सैनिक पर ह्यूग व्हाइट पड़ी। जोशील युवकों की ब्रिटिश सिपाही से बहस शुरू हो गई। इस बीच एक युवक ने उस सिपाही पर एक बर्फ का गोला फेंक दिया। फिर दूसरे अंग्रेज सिपाही भी वहां पहुंच गए और लोगों को वहां से जाने को कहा, लेकिन लोगों ने सिपाहियों पर एक के बाद एक बर्फ के गोले फेंकने शुरू कर दिए। इसके जवाब में वहां मदद के लिए पहुंचे कप्तान थॉमस प्रेस्टन और उनके कुछ साथी सिपाहियों ने हाथापाई शुरू कर दी। तभी किसी ने एक सैनिक के सिर पर डंडा दे मारा और ब्रिटिश सैनिकों ने भी गोलियां चलानी शुरू कर दी। इस गोलीबारी में पांच लोग मारे गए और आधा दर्जन से ज्यादा घायल हो गए। बोस्टन नरसंहार ने ब्रिटेन विरोधी भावना को और बढ़ा दिया। इस तरह सिर्फ एक बर्फ के गोले ने अमेरिकी क्रांति को शुरु कर दिया। इसमें कोई संदेह नहीं है कि औपनिवेशिक आक्रोश के बाद ब्रिटिश राज ने मैसाचुसेट्स को क्रांतिकारी भावना के केंद्र के रूप में माना और पूरे अमेरिका में क्रांति की आग भड़क उठी। आशीष दुबे / 05 मार्च 2026