* गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजंसी की प्रबंध निदेशक शालिनी अग्रवाल की पुस्तक में हरित निवेश और शहरी योजना पर विशेष फोकस गांधीनगर (ईएमएस)| मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार को ‘शेपिंग टुमोरोज सिटीज’ - फ्रॉम क्लाइमेट रिस्क टू ग्रीन अपॉर्च्युनिटीज’ पुस्तक का गांधीनगर में विमोचन किया। आधुनिक समय में बदलती दुनिया में शहरीकरण सबसे अधिक परिवर्तनकारी प्रक्रिया है। इसे समस्या नहीं बल्कि सस्टेनेबल, क्लाइमेट रेजिलिएंट और इनोवेटिव सिटीज के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का इस पुस्तक में विस्तृत वर्णन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शहरीकरण की चुनौतियों को अवसर में बदलने के दिए गए मार्गदर्शन को गुजरात ऊर्जा विकास निगम की प्रबंध निदेशक शालिनी अग्रवाल ने विश्व के विभिन्न देशों के अर्बन डेवलपमेंट और अर्बनाइजेशन के अनुरूप भविष्य के शहरी विकास के विजन के साथ इस पुस्तक में सटीक रूप से शामिल किया है। इस पुस्तक में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण आने वाले समय में पर्यावरण और सामाजिक चुनौतियों के लिए विशेष पूर्व योजना और नीति निर्माण के महत्व को भी शामिल किया गया है। इतना ही नहीं, इस पुस्तक में शहरीकरण के साथ बढ़ती ऊर्जा मांग, संसाधनों की खपत और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण उत्पन्न होने वाले क्लाइमेट चेंज के प्रभावों के समाधान के विचारों को भी शामिल किया गया है। भारत में भी शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और 2047 तक इसमें बड़े पैमाने पर वृद्धि होने की संभावना है। इस आर्थिक विकास यात्रा में शहरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है। बढ़ते शहरीकरण के कारण इन्फ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग, पानी और मूलभूत सेवाओं पर दबाव बढ़ता है। इसलिए शहरों की सुव्यवस्थित योजना और टिकाऊ विकास बहुत आवश्यक है, जिसकी इस पुस्तक में विस्तार से चर्चा की गई है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग के मार्ग दर्शाते हुए पुस्तक में बताया गया है कि क्लाइमेट रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए ग्रीन बॉन्ड, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, कार्बन मार्केट और क्लाइमेट फाइनेंस जैसे प्रयासों के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश प्राप्त किया जा सकता है। इन साधनों के द्वारा शहर आवश्यक पूंजी एकत्र कर सकते हैं। इसके साथ ही स्थानीय स्वराज संस्थाओं की वित्तीय क्षमता को मजबूत बनाने और म्युनिसिपल फाइनेंस सिस्टम को अधिक सुदृढ़ बनाने जैसे विषयों को भी पुस्तक में शामिल किया गया है। पुस्तक में विस्तृत वर्णन किया गया है कि शहर समस्याओं का कारण नहीं हैं, बल्कि ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जहां सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उचित आयोजन, टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल नीतियों के माध्यम से शहरों को विकास के केंद्र और ग्रीन भविष्य के आधारस्तंभ बनाया जा सकता है। सतीश/05 मार्च