- अब ब्रोकरों को प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक फाइनेंस उपलब्ध नहीं कराया जाएगा नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकिंग वित्त से कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (सीएमआईएस) के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब ब्रोकरों को प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक फाइनेंस उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। इसके अलावा, बैंक द्वारा दी जाने वाली सभी ऋण सुविधाओं के लिए 100 फीसदी गिरवी जरूरी होगी। पूंजी गिरवी पर कटौती को 25 फीसदी से बढ़ाकर कम से कम 40 फीसदी कर दिया गया है। इसका मतलब है कि 100 रुपये की गिरवी पर बैंक अब केवल 60 रुपये ही उधार दे सकता है। नए नियमों से प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग महंगी और पूंजी-सघन हो जाएगी। बैंक फंडिंग पर रोक से ट्रेडर्स के लिए उपलब्ध लिवरेज कम हो जाएगा, जो डेरिवेटिव और इक्विटी वॉल्यूम के बड़े हिस्से को प्रभावित करेगा। निजी बैंकों की इस खंड में अधिक भागीदारी होने के कारण उन्हें सबसे ज्यादा असर होने की संभावना है। पहले बैंक बैंक गारंटी जारी करके शुल्क आय कमाते थे। अब नियमों के कारण बीजी की संख्या कम हो सकती है, जिससे बैंक की शुल्क आय प्रभावित होगी। एसोसिएशन ऑफ एनएसई मेंबर्स ऑफ इंडिया के अनुसार एक्सचेंजों में लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये के बीजी हैं, और पिछले दो दशकों में गैर-निष्पादित आस्तियां लगभग शून्य रही हैं। आरबीआई ने यह कदम प्रणालीगत जोखिम को कम करने और बैंक खातों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए उठाया है। नए नियमों के लागू होने से बैंक और ब्रोकर दोनों को अधिक सतर्क रहना होगा। सतीश मोरे/06मार्च ---