- बासमती चावल निर्यात पर भी युद्ध का असर नई दिल्ली (ईएमएस)। ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच भारत में रोजमर्रा की चीज़ों की कीमतों में तेजी आने लगी है। कच्चे तेल के सह-उत्पाद प्लास्टिक दाने की कीमतों में केवल दो दिनों में 12 फीसदी की वृद्धि हुई है। चूंकि प्लास्टिक का इस्तेमाल पैकेजिंग और घरेलू सामान में व्यापक रूप से होता है, इसका असर रोजमर्रा के उत्पादों पर पड़ेगा। साथ ही, खाद्य तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। निर्यातकों के लिए समुद्र पार माल भेजना चुनौतीपूर्ण हो गया है। कंटेनर कंपनियों ने वार सरचार्ज के तहत किरायों में 150 फीसदी तक बढ़ोतरी की है। 20 टन का कंटेनर पहले 1100 डॉलर में उपलब्ध था, अब यह 3500-3700 डॉलर तक पहुंच गया है। कई कंपनियां समुद्र में फंसे माल को वापस बुला रही हैं, जिससे व्यापारियों की लागत बढ़ेगी। बासमती चावल निर्यात पर भी युद्ध का असर दिख रहा है। करीब 1.5 लाख टन चावल रास्ते में फंसा है। अगर इसे वापस बुलाया गया तो भारी आर्थिक नुकसान होगा। यूरोप और अमेरिका तक माल पहुंचाने के लिए अब लंबा केप ऑफ गुड होप मार्ग अपनाना पड़ेगा, जिससे 15 दिन अधिक समय और 30-40 फीसदी अतिरिक्त खर्च आएगा। भारत दवा निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए कच्चा माल आयात करता है। युद्ध लंबा खिंचने पर दवाओं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतें बढ़ने की संभावना है। सतीश मोरे/06मार्च ---