व्यापार
06-Mar-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। बीते तीन का इतिहास साफ बताता है कि जब-जब युद्ध हुए, या फिर बड़े वैश्विक संकट सामने आए हैं। तब बाजार औंधे मुंह गिर गया है। लेकिन उसके बाद जो होता है, उसपर पर आज बात होनी चाहिए। दरअसल, बीते तीन दशक के आंकड़ों से साफ होता है कि एक युद्ध औसतन 4 हफ्ते तक चलती है, जिसमें शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आती है। लेकिन घटना के बाद बाजार भी फिर पीछे मुड़कर नहीं देखता है, युद्ध या बड़ी घटना के बाद सेंसेक्स ने अगले 3 से 6 महीने में रिटर्न 27-37 फीसदी तक दिया है। वर्तमान मिडिल-ईस्ट में तनाव के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव जारी है। भारत में भी निवेशकों की चिंता बढ़ी है और हाल के दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। लेकिन बाजार के जानकारों का कहना है कि इतिहास बताता है कि इसतरह के भू-राजनीतिक संकट अक्सर निवेश के मौके भी बनाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध या बड़े आतंकी हमलों के बाद शेयर बाजार ने कई बार मजबूत वापसी की है। आंकड़ों के मुताबिक, ऐसी घटनाओं के बाद एक महीने में औसतन 16 प्रतिशत, 3 महीने में करीब 27 प्रतिशत और 6 महीने में लगभग 37 प्रतिशत तक रिटर्न देखने को मिला है। पिछले 3 दशकों में हुए कई बड़े घटनाक्रमों के मुताबिक 1990 का इराक युद्ध, 1999 का कारगिल युद्ध, 2001 का वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमला, 2008 का मुंबई आतंकी हमला, पुलवामा हमला और फिर 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बाजार ने जोरदार वापसी की। सेंसेक्स ने औसतन ऐसी घटना के एक महीने बाद 16 फीसदी, तीन महीने में 27 फीसदी और छह महीने बाद 37 फीसदी रिटर्न दिया है। इस बीच बाजार जानकार ने निवेशकों को सलाह दी है कि फिलहाल घरेलू बिजनेस को ध्यान में रखकर पैसे लगाना चाहिए। खासकर बैंक, इंफ्रा, कैपिटल मार्केट, सीमेंट, ऑटोमोबाइल, जिसमें निर्यात का हिस्सा सबसे कम है। निवेशकों को रियल एस्टेट और खपत संबंधी शेयरों को महत्व देना चाहिए। इतिहास बताता है कि युद्ध या बड़े हमलों की खबर आते ही बाजार में घबराहट बढ़ जाती है और निवेशक तेजी से बिकवाली में लग जाते है। लेकिन कुछ समय बाद जब स्थिति स्पष्ट होने लगती है, तब निवेशक फिर से खरीदारी शुरू कर देते हैं और बाजार संभल जाता है। ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि युद्ध के दौरान बाजार में दबाव इसलिए भी बढ़ता है कि कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आती है, फिर निवेशक सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना-चांदी में निवेश करते हैं। फिलहाल ईरान संकट के बीच भारतीय बाजार में 7-8 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है। जिससे निवेशकों की बड़ी रकम डूब गई। आशीष दुबे / 06 मार्च 2026