आबूधाबी (ईएमएस)। दुबई और सऊदी अरब सहित खाड़ी क्षेत्र में पानी की समस्या गंभीर हो गई है, खासकर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच चिंता बढ़ गई है। इन देशों में प्राकृतिक मीठे पानी का स्रोत लगभग न के बराबर है, इसलिए खारे पानी को पीने लायक बनाने वाले डीसैलाइनेशन संयंत्र उनकी जीवन रेखा बने हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर ईरान इन संयंत्रों को निशाना बनाता है, तब पूरे खाड़ी क्षेत्र में पानी संकट गहरा सकता है और इलाके को रेगिस्तान में बदलने की आशंका है। अमेरिकी केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) ने पहले ही भू-रणनीतिक मुद्दा बताकर कहा था कि पानी युद्ध की दिशा बदलने वाली कमोडिटी बन सकता है। 1970 के दशक से अब तक खाड़ी देशों में लगभग 450 डीसैलाइनेशन संयंत्र स्थापित किए गए हैं। ये संयंत्र समुद्री पानी को मीठे पानी में बदलते हैं और इन्हें चलाने के लिए तेल और गैस की जरूरत पड़ती है। सीआईए ने 1980 के दशक में यह चेतावनी दी थी कि खाड़ी देशों के लिए पानी, तेल से भी अधिक अहम है। यदि ये संयंत्र ठप पड़ जाएं, तब पूरे क्षेत्र के लोग प्यासे रह जाएंगे। सबसे संवेदनशील संयंत्र सऊदी अरब के जुबैल डीसैलाइनेशन प्लांट हैं, जिनकी 500 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन रियाद को लगभग 90 प्रतिशत पानी सप्लाई करती है। अमेरिका दूतावास के मेमो के अनुसार, अगर इस पाइपलाइन या संयंत्र को नुकसान पहुंचे, तब रियाद को सिर्फ एक सप्ताह में खाली करना पड़ सकता है। इसके बाद खाड़ी के देशों ने मजबूत वॉटर नेटवर्क और सुरक्षा उपाय विकसित किए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर ईरान-उत्पन्न युद्ध लंबा चलता है, तो ईरान खाड़ी देशों के सॉफ्ट टारगेट्स जैसे एयरपोर्ट, ऊर्जा साइट्स और डीसैलाइनेशन संयंत्रों को निशाना बना सकता है। इससे पूरे क्षेत्र में पानी की आपूर्ति बाधित हो सकती है। इसके संभावित समाधान के रूप में, दुबई और मुंबई के बीच अंडरवॉटर रेल लिंक का प्रस्ताव सामने आया है। इस परियोजना से दो घंटे में मुंबई-दुबई यात्रा संभव हो सकेगी और इसके माध्यम से तेल और पानी की सप्लाई भी सुनिश्चित की जा सकती है। प्रस्तावित ट्रेन की स्पीड 600 से 1,000 किमी प्रति घंटे हो सकती है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला और लोगों के आवागमन में तेजी आएगी। इस तरह, खाड़ी क्षेत्र के लिए पानी अब केवल जीवन का जरिया नहीं, बल्कि भू-रणनीतिक और सुरक्षा का अहम मुद्दा बन गया है। ईरान-यूएस-इजरायल तनाव में अगर संयंत्रों को नुकसान पहुंचता है, तब तेल-समृद्ध यह क्षेत्र भी गंभीर पानी संकट का सामना कर सकता है। भारत और अन्य देशों के लिए खाड़ी में पानी की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी समाधान जैसे अंडरवॉटर रेल लिंक महत्वपूर्ण हो सकते हैं। कुल मिलाकर, खाड़ी के लिए पानी अब तेल से ज्यादा रणनीतिक महत्व रखता है, और सुरक्षा के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी उपाय ही इस संकट से निपटने का रास्ता दिखा सकते हैं। आशीष/ईएमएस 07 मार्च 2026