ज़रा हटके
07-Mar-2026
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वाशिंगटन,(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका ने कैलिफोर्निया तट पर एक डूम्सडे बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सांता बारबरा के पास वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से रात 11 बजे मिनटमैन-3 बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की गई, जो हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 20 गुना ज्यादा ताकतवर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। यूएस स्पेस फोर्स के मुताबिक जीटी 254 के रूप में जाना जाने वाला निहत्था रॉकेट, पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप के पास अपने टार्गेट पर जाकर गिरा। फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के मुताबिक मिसाइल को प्रभावशीलता, तत्परता और सटीकता को सत्यापित करने के लिए दागा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दिनों अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया, जिसमें देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद पूरा मिडिल ईस्ट जंग की चपेट में आ गया है। खामेनेई की मौत के बाद ईरान की तरफ से लगातार इजराइल और मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी हैं। हिज्बुल्लाह के सक्रिय होने के बाद इजराइल ने लेबनान बेरुत में हमले किए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में ईरान पर हमले तेज करने की कसम खाई और चेतावनी देते हुए कहा कि बड़ा हमला होने वाला है। एयर फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने कहा कि मंगलवार का परीक्षण-प्रक्षेपण नियमित था और कई साल पहले से तय था। मिनटमैन-3 मिसाइल अमेरिका के परमाणु त्रिकोण का एक हिस्सा है, जिसमें जमीन समुद्र और हवा से दुनिया को नष्ट करने वाले हथियार लॉन्च करने की क्षमता शामिल है। इसे परमाणु जंग को रोकने के लिए डिज़ाइन किया है, लेकिन यह तय करना कि अगर अमेरिका पर कभी परमाणु हमला होता है, तो वह वापस हमला कर सकेगा। ट्रंप द्वारा परमाणु हथियार परीक्षणों को फिर से शुरू करने का आह्वान करने के बाद नवंबर में मिनटमैन-3 मिसाइल भी लॉन्च की गई थी। मिनटमैन-3 अमेरिका की सबसे पुरानी आईसीबीएम है, जो 1970 के दशक से इस्तेमाल हो रही है। यह जमीन से लॉन्च होती है और 13,000 किलोमीटर दूर तक मार कर सकती है। इसमें न्यूक्लियर वॉरहेड लगाया जा सकता है, लेकिन इस टेस्ट में कोई हथियार नहीं था। अमेरिका के पास करीब 400 ऐसी मिसाइलें हैं, जो रूस और चीन जैसे देशों के खिलाफ रक्षा का हिस्सा हैं। यह मिसाइल मिनटमैन नाम से इसलिए जानी जाती है क्योंकि यह एक मिनट में तैयार हो जाती है। अमेरिका 2030 तक इसे नई मिसाइल से बदलने की योजना बना रहा है, लेकिन तब तक ये टेस्ट जारी रहेंगे। सिराज/ईएमएस 07 मार्च 2026