पैट्रियट-टॉमहॉक निकाल रहा दिवाला वाशिंगटन (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में शुरू हुआ ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष अब एक बड़े वैश्विक संकट को खड़ा कर रहा है। एक सटीक खुफिया ऑपरेशन के तहत ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया, जिसमें देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई और 40 से अधिक वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की मौत की खबर सामने आई। अमेरिका और इजरायल को उम्मीद थी कि अभियान से कुछ ही दिनों में ईरान की सैन्य और राजनीतिक ढांचा ध्वस्त होगा और देश में शासन परिवर्तन की स्थिति बनेगी। लेकिन युद्ध के शुरुआती चार दिनों में जो घटनाक्रम सामने आया है, उस घटनाक्रम ने दुनिया को चौंका दिया है। ईरान ने जोरदार पलटवार कर न केवल अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है, बल्कि अमेरिका और इजरायल की रणनीतिक गणनाओं को भी चुनौती दे दी है। इस युद्ध की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी लागत से जुड़ी असमानता है। अमेरिका और इजरायल के पास दुनिया की सबसे आधुनिक सैन्य तकनीक है, लेकिन इन हथियारों की लागत बेहद अधिक है। आर्मी के रिटायर्ड अधिकारी और चिंतन रिसर्च फाउंडेशन में कंसल्टेंट कर्नल के अनुसार, शुरुआती आकलनों के अनुसार ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले 24 घंटों में ही अमेरिका को करीब 77.9 करोड़ डॉलर का खर्च उठाना पड़ा। तीन दिनों के भीतर यह लागत करीब 1.24 अरब डॉलर तक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि अमेरिका को हर दिन तकरीबन 1 अरब डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। हालांकि, अमेरिका का रक्षा बजट लगभग एक ट्रिलियन डॉलर है, लेकिन समस्या कुल खर्च नहीं, बल्कि हथियारों की प्रति यूनिट लागत है। बता दें कि अमेरिकी पैट्रियट और टॉमहॉक मिसाइलों की कीमत करीब 10 से 30 लाख डॉलर तक होती है। इसके मुकाबले ईरान की एक औसत बैलिस्टिक मिसाइल की कीमत केवल 8 लाख से 10 लाख डॉलर के बीच है। इसी तरह अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की कीमत लगभग 3 करोड़ डॉलर है, जबकि ईरान का शाहेद ड्रोन मात्र 30 से 50 हजार डॉलर में तैयार हो जाता है। इस भारी लागत अंतर का मतलब यह है कि अमेरिका और इजराइल के लिए लंबे समय तक इस युद्ध को जारी रखना आर्थिक रूप से बेहद महंगा साबित हो सकता है। एक रिपोर्ट में ईरान युद्ध की कीमत के बारे में अनुमान लगाया गया है। इस युद्ध की कुल आर्थिक कीमत अमेरिका के लिए 210 अरब डॉलर (19 लाख करोड़ रुपया) तक पहुंच सकती है। इस आंकड़े में प्रत्यक्ष सैन्य खर्च भी शामिल है, जिसे लगभग 95 अरब डॉलर (870489 करोड़ रुपये) तक आंका गया है। युद्ध के चार दिनों के भीतर ही अमेरिका और इजरायल के मिसाइल भंडार पर दबाव बढ़ने की आशंका। अनुमान है कि युद्ध क्षेत्र में पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या लगभग 600 से 800 के बीच है। किसी एक मिसाइल को रोकने के लिए चार से छह इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी जाती हैं। अब तक लगभग 150 से 200 इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल हो चुकी हैं। यदि इसी गति से हमले जारी रहे, तब अगले चार से सात दिनों में इनकी उपलब्धता संकट में पड़ सकती है। ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि अमेरिका जापान और दक्षिण कोरिया से कुछ पैट्रियट मिसाइलें खाड़ी क्षेत्र में ट्रांसफर करने पर विचार कर रहा है। दूसरी ओर ईरान के पास मिसाइलों और ड्रोन का विशाल भंडार बताया जा रहा है। विभिन्न अनुमानों के अनुसार ईरान के पास 20,000 से 50,000 तक अलग-अलग प्रकार की मिसाइलें हो सकती हैं। इसके अलावा हजारों की संख्या में ड्रोन भी मौजूद हैं, जिसमें से कई पहाड़ों के अंदर बने भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित रखे गए हैं। आशीष/ईएमएस 07 मार्च 2026