- कंपनी भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में लगभग 45 फीसदी रखती है हिस्सेदारी अहमदाबाद (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष का प्रत्यक्ष असर अब भारतीय ऑटो उद्योग पर दिखने लगा है। प्राकृतिक गैस और प्रोपेन की कमी के कारण टाटा मोटर्स को गुजरात के साणंद स्थित अपने संयंत्रों में उत्पादन में 50 फीसदी तक की कटौती करनी पड़ सकती है। गुजरात गैस लिमिटेड ने पुष्टि की कि देश के प्रमुख गैस आपूर्तिकर्ताओं ने उद्योगों को गैस की आपूर्ति आधी कर दी है। साणंद प्लांट में गैस का इस्तेमाल मुख्य रूप से पेंट-शॉप ओवन को गर्म करने और पेंट को सुखाने (क्युरिंग) के लिए किया जाता है। बिना पेंट किए वाहन स्टॉक में नहीं रखे जा सकते, इसलिए उत्पादन लाइन को रोकना ही एकमात्र विकल्प बचता है। साणंद में टाटा मोटर्स के दो संयंत्र हैं, जिनकी सालाना क्षमता 4,50,000 से अधिक कारों की है। यहां नेक्सॉन, टियागो, टिगोर, सिएरा, कर्व और इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन होता है। कंपनी भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में लगभग 45 फीसदी हिस्सेदारी रखती है। हालांकि कारों की मांग बढ़ी हुई है। फरवरी में बिक्री में 35 फीसदी वार्षिक वृद्धि और निर्यात में 167 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। लेकिन गैस संकट से उत्पादन बाधित होने से मांग और सप्लाई में असंतुलन हो सकता है। सतीश मोरे/07मार्च ---