ईरान मान लेता बात तो अमेरिका नहीं डुबा पाता ईरानी पोत नहीं मारे जाते लोग नई दिल्ली,(ईएमएस)। ईरान का आईआरआईएस डेना आज सुरक्षित होता अगर ईरान भारत की एक बात मान लेता। दरअसल, ईरानी फ्रिगेट को लेकर बड़ा खुलासा है। अमेरिकी सबमरीन के अटैक से पहले ही भारत ने ईरानी जहाज को पनाह देने की पेशकश की थी। भारत ने कहा था कि अभी जहाज मत ले जाओ। युद्ध जैसे हालात हैं। अभी जाना सही नहीं होगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका के पास अमेरिकी सबमरीन ने ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस डेना को डुबोया दिया लेकिन उससे ठीक पहले ही भारत ने उसे अपने एक पोर्ट पर पनाह देने की पेशकश की थी। बताया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत की ओर से सेफ हार्बर का ऑफर दिया गया था। अमेरिका का ईरान पर हमला 28 फरवरी को शुरू हुआ। इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर एयर स्ट्राइक की और ईरान के सुप्रील लीडर खामेनेई को मार डाला। दरअसल आईआरआईएस डेना भारत आया था। वह 25 फरवरी को खत्म हुए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और मिलन-2026 अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद विशाखापत्तनम से निकला था। 4 मार्च की सुबह अमेरिका ने टॉरपीडो से अटैक कर उसे डुबो दिया। भारतीय नौसेना के मुताबिक, वॉरशिप गाले से 20 नॉटिकल मील पश्चिम में ऑपरेट कर रहा था। सरकारी सूत्रों के मुताबिक अब दूसरा ईरानी वॉरशिप आईआरआईएस लवन को 4 मार्च को ही कोच्चि पोर्ट पर डॉक किया गया। ठीक उसी दिन डेना पर टॉरपीडो से हमला हुआ था। सूत्रों ने बताया कि 28 फरवरी को ईरान ने भारत से लावन को अपने पास रखने की रिक्वेस्ट की थी, क्योंकि जहाज में टेक्निकल दिक्कतें आ गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक 1 मार्च को इसकी डॉकिंग की मंजूरी मिली और लावन 4 मार्च को कोच्चि पहुंचा। सूत्रों ने बताया कि इसके 183 क्रू मेंबर्स को कोच्चि में नेवल फैसिलिटीज़ में ठहराया गया है। सरकारी सूत्रों ने कन्फर्म किया कि आईआरआईएस लवन 4 मार्च को कोच्चि पोर्ट पर डॉक हुआ था और तब से वहीं है। वहीं, श्रीलंका ने कहा कि उसने एक और ईरानी वॉरशिप आईआरआईएस बुशहर को अपने एक पोर्ट पर डॉक करने की इजाजत दी है। सिराज/ईएमएस 07मार्च26 -----------------------------