राज्य
07-Mar-2026


:: 4,000 खातों पर चला डिजिटल हथौड़ा; तकनीकी मार से हिला साइबर गैंग का नेटवर्क :: इंदौर (ईएमएस)। देशभर में तेजी से पांव पसार रहे साइबर अपराधों के खिलाफ इंदौर क्राइम ब्रांच ने एक निर्णायक और सख्त रुख अपनाया है। पुलिस की तकनीकी विंग ने जनवरी और फरवरी 2026 के दो महीनों के भीतर बड़ी सफलता हासिल करते हुए ठगों के चंगुल से 1.27 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को वापस निकलवाकर पीड़ितों को बड़ी राहत प्रदान की है। यह कार्रवाई साइबर ठगों के बढ़ते मनोबल पर एक कड़ा प्रहार मानी जा रही है। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने जानकारी देते हुए बताया कि साल 2026 की शुरुआत के दो महीने - जनवरी और फरवरी साइबर अपराधियों के लिए बेहद सक्रिय रहे थे। इस दौरान शहर के बड़ी संख्या में लोग डिजिटल ठगी, विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट और लुभावने निवेश के जाल में फंसकर अपनी जीवनभर की कमाई गंवा बैठे थे। जैसे ही पीड़ित परिवार क्राइम ब्रांच पहुंचे, पुलिस ने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए अपनी तकनीकी टीम को पूरी क्षमता के साथ मैदान में उतार दिया। पुलिस की इस त्वरित सक्रियता का ही परिणाम रहा कि ठगों के बैंक खातों में होल्ड करवाई गई बड़ी रकम उनके डिजिटल वॉलेट से बाहर नहीं निकल पाई और सुरक्षित रूप से पीड़ितों को वापस दिला दी गई। साइबर अपराध की जड़ों को सूखने के उद्देश्य से क्राइम ब्रांच ने एक विशेष क्लीनअप अभियान छेड़ा है। इस अभियान के तहत पुलिस ने संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में लिप्त 4,000 से अधिक बैंक खातों को हमेशा के लिए ब्लॉक कर दिया है, जिससे इन ठगों का आर्थिक नेटवर्क पूरी तरह से पंगु हो गया है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर लोगों को शिकार बनाने वाली 150 से अधिक आईडी को डिजिटल दुनिया से स्थायी रूप से हटा दिया गया है। साथ ही, हैकर्स द्वारा हथियाए गए फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट्स को भी तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से वापस रिकवर कराकर उनके मूल मालिकों को सौंपा गया है। :: सावधान! डिजिटल अरेस्ट सिर्फ एक धोखा है :: पुलिस प्रशासन ने शहरवासियों को सतर्क करते हुए स्पष्ट चेतावनी जारी की है। एडिशनल डीसीपी ने जोर देकर कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई भी कानूनी प्रक्रिया भारतीय कानून में अस्तित्व में नहीं है। यह पूरी तरह से एक डरावना खेल और ढकोसला है, जिसका उपयोग अपराधियों द्वारा लोगों को मानसिक दबाव में लेकर लूटने के लिए किया जाता है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि किसी भी अज्ञात एपीके (APK) फाइल को डाउनलोड न करें और न ही निवेश के नाम पर रातों-रात पैसा दोगुना करने के लुभावने ऑफर्स के झांसे में आएं। :: ठगी हुई? तो तुरंत करें 1930 पर कॉल :: क्राइम ब्रांच ने एक बार फिर दोहराया है कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में रिपोर्टिंग का समय सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या धोखाधड़ी का आभास होते ही पीड़ित को घबराने के बजाय तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। समय रहते दी गई सूचना ही ठगों के जाल से पैसा वापस पाने की एकमात्र और सबसे प्रभावी कुंजी है। इंदौर पुलिस की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्कता और पुलिस का साथ, साइबर अपराधियों को शिकस्त देने के लिए पर्याप्त है। प्रकाश/07 मार्च 2026