छिंदवाड़ा (ईएमएस)। युवा प्रणव शर्मा को परशुराम दल का जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। मध्य प्रदेश परशुराम दल के प्रदेश अध्यक्ष पंडित वीरेंद्र उपाध्याय की अनुशंसा पर राष्ट्रीय अध्यक्ष, गंगा धर्म शर्मा ने उन्हें ये जिम्मेदारी दी है। इस नियुक्ति पर पूरे जिले भर के ब्रह्म समाज एवं वरिष्ठ जनों ने उन्हें बधाई देकर शुभकामनाएं व्यक्त की है। बधाई देने वालों में विप्र पुरोहित सेवा संगठन के अध्यक्ष श्रवण कुमार शर्मा, पंडित राजेश शर्मा स्वदेशी, आचार्य दयाराम शर्मा, नंदकिशोर शर्मा, गौ रक्षा प्रमुख अनु शर्मा, क्षितिज तिवारी, अर्पित पांडे, आचार्य रुपेश तिवारी, मनोज दुबे, केशव दुबे, अजय शर्मा, प्रकाश शर्मा, तरुण शर्मा, हरिओम तिवारी, प्रकाश शुक्ला आदि शामिल हैं। महिला दिवस पर विशेष समाज की पुरुष-प्रधान मान्यताओं को बीते कई दशकों से महिलाओं ने चुनौती देते हुए हर क्षेत्र में स्वयं को स्थापित किया है। महिलाओं नअपने हक़ों की आवाज़ उठाई ही है साथ ही पुरुषों ने भी उनके महत्व को समझाया है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जिले की कुछ महिलाओं के ऐसे काम जो समाज में मिसाल बन रहे हैं। अपने हुनर से बालीवुड में जगमगा रही है देवयानी अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता से छिंदवाड़ा जैसे छोटे शहर की देवयानी अनंत इन दिनों बालीवुड में अपनी पहचान बना रही है। नौकरीपेशा माता पिता की बेटी देवयानी पारिवारिक संस्कार और शिक्षा के माहौल ने पली बढ़ी। पढ़ाई के साथ अनुशासन, रचनात्मकता और समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण उन्होंने विकसित किया। देवयानी ने विदिशा कालेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद मुंबई विश्वविद्यालय से फिल्म निर्देशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। फिल्म इंडस्ट्री में वे एक दशक से सक्रिय है। इस दौरान उन्होंने कई बड़े बैनरों की फिल्मों और विज्ञापनों में निर्देशन, प्रोडक्शन और आर्ट डायरेक्शन विभागों में काम किया है। वे प्रसिद्ध फिल्मकार प्रकाश झा और नागेश कुकुनूर के साथ भी काम कर चुकी हैं। साथ ही सत्याग्रह, रेस 2 और लक्ष्मी जैसी फिल्मों के डायरेक्शन क्रू का हिस्सा रहकर उन्होंने मुख्यधारा सिनेमा की कार्यप्रणाली को करीब से समझा। कहानी लिखने का शौक उन्हें बचपन से रहाविशेषकर बच्चों के लिए। इसी जुनून के चलते उन्होंने अपना प्रोडक्शन हाउस कथार्सिस फिल्म्स स्थापित किया। उनके बैनर तले बनी बच्चों की फीचर फिल्म बाइसिकल डेज़ उनकी पहली फिल्म है, जिसकी लेखिका, निर्देशक और निर्माता स्वयं देवयानी हैं। वर्तमान में देवयानी फिल्म वितरण और कंटेंट मार्केटिंग से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय हैं और अपने अनुभव के साथ भारतीय सिनेमा में बच्चों और कल्पनाशील कहानियों को नई पहचान देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। छिंदवाड़ा की यह बेटी आज फिल्म जगत में अपने हुनर से शहर और प्रदेश का नाम रोशन कर रही है। गांव की उमा सैकड़ों महिलाओं के लिए बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल कुछ करने का जुनून हो और मौका मिले तो गांव की महिलाएं न सिर्फ अपने को आत्मनिर्भर बनाती है बल्कि कई और महिलाओं कोभी यह रास्ता दिखाती है। उमा सोनी जिले की एक ऐसी ही महिला है। गांव में रहने वाली और घर में पापड़ बनाने वाली उमा ने इस काम से ही बड़ा बनने की सोची। सोच सकारात्मक हो तो रास्ते भी खुलते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र की खाद्य प्रसंस्करण ईकाई से उन्होंने पापड़ निर्माण का प्रशिक्षण लिया और पापड़ निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। केंद्र द्वारा उन्हें उत्पादन, गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन दिया। आज उमा सोनी का पापड़ उद्योग सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और वे अपनी मेहनत से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उनका यह प्रयास न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। इमलीखेड़ा स्थित उनका उमा श्री पापड़ उद्योग कई दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन रहा है। कई अधिकारी उनसे मिल चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर के प्रदर्शन और मेलों में उनकी सहभागिता जिले की और खासकर गांवों की महिलाओंं को भी उनकी तरह आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। अनाथ बेटियों के लिए बनाया परिवार फोटो है किरण सोनी की तीन साल की उम्र में माता पिता चले गए। बुआ ने जैसे तैसे बड़ा किया। विवाह की बात आई तो शादी के लिए पैसे ही नहीं। ऐसे में मातृत्व ग्रुप आगे आया और बेटी के विवाह का जिम्मा संभाला। ऐसी एक नहीं अब तक 29 बेटियों का परिवार बनकर उन्हें अपने ससुराल विदा कर चुका है यह ग्रुप। समाजसेवी और शिक्षिका किरण सेानी ने यह ग्रुप 2006 में बनाया था। निस्वार्थ भाव से सेवा की यह अद्भुत मिसाल है। ये सिर्फ विवाह नहीं, बल्कि संवेदनाओं, सहयोग और निस्वार्थ परोपकार की ऐसी मिसाल है, जिसने समाज को यह संदेश दिया कि बेटी कभी अकेली नहीं होती—समाज उसका परिवार बन सकता है। किरण सोनी कहती है हमने शुरुआत की और हमें सहयोग करने के लिए कई हाथ आगे बढ़े। आज भी कई लोग हमारे साथ हैं ये हमें ऐसे और काम करने की प्रेरणा देते हैं। सोनी ने बताया कि माता पिता का साया उठ जाना एक बेटी के लिए ताउम्र पीड़ादायी अहसास होता है। हम ऐसी बेटियों का परिवार बन उनके जीवन में खुशियां लाने का काम कर रहे हें। इससे आत्मीय खुशी हेाती है कि हम भीसमाज को कुछ देने के काबिल बन सकते हैं। समाज में करुणा, सहयोग और मातृत्व भाव की सशक्त मिसाल यह ग्रुप दे रहा है। सास-बहू संभाल रही है होम स्टे का संचालन महिला सशक्तीकरण की एक और मिसाल छिंदवाउ़ा जिले में देखने को मिल रही है। मनेशी धुर्वे और अलका धुर्वे रिश्ते में तो ये सास-बहु हैं लेकिन इन दिनों धूसावानी में पर्यटन विभाग द्वारा बनाए गए होम स्टे को संचालित करती हैं। पर्यटकों का स्वागत, उनके रहने का इंतजाम और उनके भेाजन की व्यवस्था के साथ घूमने फिरने की व्यवस्था सबका जिम्मा दोनों मिलकर उठाती है। ऐसा ही सावरवानी में मालती यदुवंशी अपनी सास शारदा यदुवंशी के साथ कर रही है। ये महिलाएं जहां आत्मनिर्भरता का संदेश दूसरी महिलाओं को दे रही है वहीं उनके जीवन को नई दिशा देने का काम भी कर रहीं हैं। जिले के हर होम स्टे के संचालन में महिलाओं का योगदान अतुलनीय है। जिले में इन दिनों 50 होम स्टे संचालित हो रहे हैं सारे होम स्टे महिलाओं के नाम पर ही रजिस्टर्ड किए गए हैं। चोपना, काजरा, देवगढ़, चिमटीपुर, गुमतरा और धूसावानी में महिलाएं न केवल अपनी पारंपरिक जिम्मेदारियों को निभा रही हैं, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से अपनी पहचान बना रही हैं। ये महिलाएं अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी प्रस्तुत कर महिला सशक्तीकरण का संदेश पूरे देश में दे रहीं हैं। ईएमएस/मोहने/ 07 मार्च 2026