देहरादून(ईएमएस)। उत्तराखंड की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों की तपिश अभी से महसूस होने लगी है। राज्य में सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले की तस्वीर साफ होती दिख रही है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देवभूमि के दौरे के दौरान कांग्रेस पर चौतरफा हमला बोलकर भविष्य की चुनावी जंग का एजेंडा तय कर दिया है। शाह के तेवरों ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में दोनों दलों के बीच आरोपों-प्रत्यारोपों की लड़ाई और अधिक तीखी होने वाली है। अमित शाह ने अपने संबोधन में ऐतिहासिक संदर्भों से लेकर वर्तमान राजनीतिक स्थितियों तक कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के काले अध्याय रामपुर तिराहा कांड का जिक्र करते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। शाह ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से छोटे राज्यों के गठन की विरोधी रही है। उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ के निर्माण के समय विपक्षी दल ने यह तर्क दिया था कि छोटे राज्य प्रगति नहीं कर पाएंगे, लेकिन आज ये तीनों राज्य विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर हैं। केंद्रीय गृह मंत्री ने भाजपा सरकार द्वारा लिए गए कड़े निर्णयों, जैसे समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और मतांतरण विरोधी कानून का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के नजरिए पर प्रहार किया। उन्होंने जनसभा में मौजूद जनता से सीधा सवाल किया कि उन्हें विकास वाली सरकार चाहिए या मुगलपरस्त मानसिकता वाली कांग्रेस। इसके साथ ही उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के मुद्दे पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया। शाह ने दो टूक शब्दों में कहा कि विरोध के बावजूद केंद्र सरकार पड़ोसी देशों से धार्मिक प्रताड़ना सहकर आए शरणार्थियों को नागरिकता देकर रहेगी। उन्होंने कांग्रेस पर घुसपैठियों का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पूरी तरह बिखर चुकी है और उन्हें हर सकारात्मक कार्य में केवल नकारात्मकता ही दिखाई देती है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तुलना करते हुए शाह ने त्रिवेंद्र सिंह रावत से लेकर पुष्कर सिंह धामी तक के नौ वर्षों के कार्यकाल को जीरो टॉलरेंस वाला बताया। उन्होंने दावा किया कि विरोधी भी भाजपा सरकार पर एक पैसे के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा सके हैं। वहीं, कांग्रेस पर पलटवार करते हुए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग प्रकरण और छात्रवृत्ति घोटाले की याद दिलाई। शाह की ये टिप्पणियां संकेत दे रही हैं कि आगामी चुनावों में भाजपा एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को काटने के लिए कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड और संगठन की कमजोरी को अपना मुख्य हथियार बनाएगी। इस आक्रामक रुख से उत्तराखंड की सियासी फिजां पूरी तरह चुनावी रंग में रंग गई है। वीरेंद्र/ईएमएस/08मार्च2026