तेहरान,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने पद संभालने के तुरंत बाद इजरायल पर मिसाइल हमला किए जाने की खबर सामने आई। बताया जा रहा है कि यह हमला नए नेतृत्व की घोषणा के तुरंत बाद किया गया, जिससे पहले से ही तनावपूर्ण माहौल और गंभीर हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अपने नए सर्वोच्च नेता के नेतृत्व में मिसाइलों की पहली खेप इजरायल के नियंत्रण वाले इलाकों की ओर दागी। सरकारी प्रसारण से जुड़ी रिपोर्टों में दावा किया गया कि यह कार्रवाई देश की सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है। मिसाइल हमले से जुड़ी तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें आसमान में दागी गई मिसाइलों के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई, दिवंगत पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के पुत्र हैं। उनके पिता ने करीब 37 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया था। 28 फरवरी को तेहरान में हुए एक कथित अमेरिकी-इजरायली हमले में उनकी मौत हो गई थी। उनके निधन के बाद देश में नए सर्वोच्च नेता के चयन को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई थी। इस बीच इजरायल की सेना ने कुछ समय पहले ही सख्त चेतावनी जारी की थी। सेना ने फारसी भाषा में सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा था कि अयातुल्ला अली खामेनेई के संभावित उत्तराधिकारी या नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति की प्रक्रिया में शामिल किसी भी व्यक्ति को निशाना बनाया जा सकता है। यह चेतावनी उस समय दी गई थी जब ईरान की धार्मिक संस्था एसेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स अगले सर्वोच्च नेता के चयन के लिए बैठक करने वाली थी।विश्लेषकों का मानना है कि नए सुप्रीम लीडर की घोषणा और उसके तुरंत बाद हुआ मिसाइल हमला दोनों देशों के बीच तनाव को और गहरा कर सकता है। पहले से ही पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद लगभग एक सप्ताह तक ईरान में नए सर्वोच्च नेता का चयन नहीं हो पाया था। इस दौरान देश की बागडोर तीन सदस्यीय अस्थायी समिति के हाथों में थी। नेतृत्व में देरी के कारण कुछ राजनीतिक और सामाजिक समूहों में असंतोष भी देखा गया।विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जैसे हालात में सेना और जनता का मनोबल बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट नेतृत्व आवश्यक होता है। अब मोजतबा खामेनेई के सत्ता संभालने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्रीय राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। अमेरिका बना रहा यूरेनियम नियंत्रण की योजना दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कथित तौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक विशेष सैन्य विकल्प पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस योजना में अमेरिकी विशेष बलों को ईरान में तैनात कर वहां मौजूद अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को अपने नियंत्रण में लेने की संभावना पर चर्चा की जा रही है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव की जानकारी कुछ राजनयिक अधिकारियों को दी गई है। वीरेंद्र/ईएमएस/09मार्च2026