अंतर्राष्ट्रीय
09-Mar-2026
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-चैटजीपीटी हेल्थ की विश्वसनीयता को लेकर नए अध्ययन ने खड़े हुए गंभीर सवाल नई दिल्ली,(ईएमएस)। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वास्थ्य सलाह देने वाले टूल चैटजीपीटी हेल्थ की विश्वसनीयता को लेकर नए अध्ययन ने गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। एक शोध के मुताबिक यह एआई टूल कई गंभीर चिकित्सा स्थितियों में आपातकालीन स्तर का सही आकलन करने में असफल रहा है। अध्ययन में पाया गया कि यह प्रणाली आधे से ज्यादा आपातकालीन मामलों में जरुरी तत्काल चिकित्सा सहायता की बजाय कम प्राथमिकता वाली सलाह देती है। यह अध्ययन अमेरिका के शोधकर्ताओं ने किया जिसका नेतृत्व डॉ. अश्विन रामास्वामी ने किया। शोध 23 फरवरी 2026 को ऑनलाइन प्रकाशित हुआ, जबकि यह टूल 7 जनवरी 2026 को आम उपयोगकर्ताओं के लिए लॉन्च किया गया था। अध्ययन में एआई की चिकित्सकीय प्राथमिकता तय करने की क्षमता का परीक्षण किया गया। शोधकर्ताओं ने 21 चिकित्सा क्षेत्रों से जुड़े 60 क्लिनिकल परिदृश्यों तैयार किए, जिन्हें चिकित्सकों ने लिखा था। इन पर 16 अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षण कर कुल 960 प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया गया। परिणामों में एक “उल्टे यू आकार” का प्रदर्शन पैटर्न सामने आया, जिसमें एआई मध्यम स्तर की स्थितियों को अपेक्षाकृत बेहतर पहचान सका, लेकिन बहुत गंभीर या बहुत हल्की स्थितियों में इसकी सटीकता कम रही। अध्ययन में पाया गया कि यह टूल स्ट्रोक या एनाफिलैक्सिस जैसी पारंपरिक आपात स्थितियों को कई बार सही पहचान लेता है। हालांकि स्वर्ण-मानक आपात स्थितियों में 52 फीसदी मामलों में इसने स्थिति को कम गंभीर मानते हुए उपयोगकर्ताओं को 24 से 48 घंटे के अंदर डॉक्टर से मिलने जैसी सलाह दी, जबकि वास्तविकता में तुरंत आपातकालीन विभाग में इलाज की जरूरत थी। इनमें डायबिटिक कीटोएसिडोसिस और संभावित श्वसन विफलता जैसे जानलेवा मामले भी शामिल थे। हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह अध्ययन कृत्रिम उदाहरणों पर आधारित था और वास्तविक परिस्थितियों में और परीक्षण की जरुरत है। दूसरी ओर ओपनएआई ने स्वतंत्र शोध का स्वागत करते हुए कहा कि अध्ययन वास्तविक उपयोग के सामान्य पैटर्न को पूरी तरह नहीं दर्शाता और मॉडल को लगातार अपडेट किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अध्ययन एआई आधारित स्वास्थ्य सलाह प्रणालियों की सीमाओं को उजागर करता है और व्यापक उपयोग से पहले इनके सुरक्षित और विश्वसनीय होने की पुष्टि जरूरी है। सिराज/ईएमएस 09 मार्च 2026