राज्य
09-Mar-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। पूर्वी दिल्ली की यमुनापार सड़कों पर अवैध मलबे और निर्माण सामग्री का बोझ बढ़ गया है, जिससे कई मुख्य मार्ग स्थायी डंपिंग जोन बन गए हैं। इससे सड़कें संकरी हो गई हैं और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। पूर्वी दिल्ली में यमुनापार की सड़कों पर सिर्फ यातायात का ही भार नहीं है, बल्कि अवैध रूप से डाले गए मलबे और भवन निर्माण सामग्री का बोझ भी ढो रही हैं। इलाके की कई मुख्य सड़कें स्थायी डंपिंग जोन में तब्दील हो गई हैं, जिससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन सड़कों पर चलना जोखिम भरा हो गया है। दो लेन की सड़कें अतिक्रमण के कारण एक लेन में सिमट कर रह गई हैं। ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता जब इन स्थानों पर हादसे का खतरा न बना रहता हो। गाजीपुर, कड़कड़ी मोड़, कोंडली मोड़, प्रीत विहार और अजित नगर की जिन सड़कों पर वाहनों को फर्राटा भरना चाहिए था, वहां भवन निर्माण सामग्री और मलबे के ढेर लगे हुए हैं। इससे सड़कें दुर्घटना संभावित क्षेत्र में बदल गई हैं। अतिक्रमण के कारण इन सड़कों की चौड़ाई आधे से भी कम रह गई है। वाहनों के गुजरने पर धूल उड़ती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में सड़क की हालत और खराब हो जाती है। मालवाहक वाहनों से रोजाना सड़क किनारे मलबा डाला जाता है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। गाजीपुर मंडी के पास निगम पार्किंग के पास सड़क डंपिंग जोन में बदल चुकी है। सड़क के दोनों ओर मलबा डाला जा रहा है, जिससे सड़क अपनी पहचान खो चुकी है। धूल और मलबे से सड़क पूरी तरह पट गई है और बरसात में यह जानलेवा बन जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब एक साल पहले तक सड़क की स्थिति ठीक थी, लेकिन उसके बाद यहां मलबा डाला जाने लगा और धीरे-धीरे पूरी सड़क डंपिंग जोन में तब्दील हो गई। पास में उत्तर प्रदेश की सीमा होने के कारण अब दिल्ली और यूपी दोनों तरफ से यहां मलबा डाला जा रहा है। कोंडली मोड़ के पास से गुजरने वाली नाला रोड इलाके को एनएच-नौ से जोड़ती है। इस सड़क की हालत यह है कि आवागमन की एक लेन पूरी तरह मलबे से ढक गई है। पुराने घरों की टूटी छतों और ईंट-पत्थरों के ढेर राहगीरों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/09/मार्च/2026