क्षेत्रीय
09-Mar-2026
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- अतिक्रमण हटाने पर जोर, विस्थापन के दावे कमजोर जबलपुर, (ईएमएस)। मदन महल पहाड़ी पर वर्षों से बसे करीब 714 परिवार इन दिनों असमंजस और भय के माहौल में जी रहे हैं। न्यायालय के आदेश पर प्रशासन द्वारा अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई लगातार जारी है। बुल्डोजर की आवाज के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि 40-50 साल से यहां रह रहे इन परिवारों का भविष्य अब क्या होगा? सोमवार को भी प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा और अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। कई परिवारों ने बुल्डोजर चलने से पहले ही अपने घरों की टीन, दरवाजे, खिड़कियां और अन्य सामग्री स्वयं निकालनी शुरू कर दी, ताकि कुछ सामान सुरक्षित बचाया जा सके। लोगों का कहना है कि मलबे में सब कुछ टूट जाता है, इसलिए जो बच सके वही आने वाले दिनों में काम आएगा। पीढ़ियों का बसेरा, एक झटके में उजड़ा ………. मदन महल पहाड़ी पर बसे कई परिवारों का कहना है कि वे यहां पिछले चार-पांच दशकों से रह रहे हैं। यहीं बच्चों का जन्म हुआ, यहीं उनकी परवरिश हुई और यहीं से रोजी-रोटी का जरिया जुड़ा। बुजुर्गों की आंखों में आंसू थे। उनका कहना था कि जमीन भले ही सरकारी हो, लेकिन वे अपराधी नहीं हैं। वर्षों से रह रहे लोगों को अचानक हटाना उनके लिए बेहद कठिन है। कार्रवाई के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले। महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे अपने घरों को टूटता देख बिलख पड़े। कुछ बच्चे स्कूल ड्रेस में ही खड़े थे। घर उजड़ने की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। तेवर में पुनर्वास, लेकिन सुविधाएं अधूरी ………. प्रशासन के अनुसार सभी परिवारों को तेवर क्षेत्र में शिफ्ट किया जाएगा और प्रत्येक को 450 वर्गफीट का प्लॉट दिया जाएगा। लेकिन विस्थापित होने वाले परिवारों का कहना है कि मौके पर न तो बिजली की व्यवस्था है, न पानी, न नाली और न शौचालय। कुछ लोगों को अस्थायी तौर पर बांस और तंबू दिए जा रहे हैं। पर्ची मिली लेकिन सूची में नाम नदारद......... कई परिवारों का दावा है कि वर्ष 2019 में उन्हें पर्ची दी गई थी, लेकिन अब पट्टा सूची में उनका नाम नहीं है। ऐसे परिवारों में सबसे ज्यादा चिंता है कि कहीं वे पूरी तरह बेघर न हो जाएं। महिलाओं का कहना है कि घर में जवान बेटियां हैं, खुले मैदान में रहना सुरक्षित नहीं होगा। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ………. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पिछले तीन दिनों से चल रही इस बड़ी कार्रवाई के बीच अब तक किसी भी राजनीतिक दल का कोई भी जनप्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय वादे किए जाते हैं, लेकिन संकट की घड़ी में कोई साथ खड़ा नजर नहीं आता। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश के तहत की जा रही है और सभी को नियमानुसार पुनर्वास दिया जाएगा। लेकिन जमीनी स्थिति और लोगों की आशंकाएं कई सवाल खड़े कर रही हैं। सुनील साहू / शहबाज / 09 मार्च 2026/ 06.22