क्षेत्रीय
09-Mar-2026
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वाराणसी (ईएमएस)। किसान मेला-2026 का आयोजन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान (IAgSc) में किया गया, जिसमें किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों को एक साथ लाकर वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने तथा शोध संस्थानों और किसान समुदाय के बीच साझेदारी प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, सूर्य प्रताप शाही, माननीय कृषि शिक्षा एवं कृषि मंत्री,उत्तर प्रदेश तथा प्रो. अमित पात्रा, निदेशक ,भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) वाराणसी,ने औपचारिक रूप से किसान मेले का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद सभी गणमान्य अतिथियों ने प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और किसानों, वैज्ञानिकों तथा प्रतिभागियों से बातचीत करते हुए वहाँ प्रदर्शित तकनीकों, उत्पादों और नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. चतुर्वेदी ने वैज्ञानिक अनुसंधान को किसानों के व्यावहारिक ज्ञान के साथ जोड़ने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के पास खेतों से जुड़ा अमूल्य अनुभव होता है और उन्हें कृषि नवाचार में साझेदार के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। मुख्य अतिथि एवं माननीय कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने में नवाचार और किसानों की भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति को किसानों तक जमीनी स्तर पर पहुँचाना आवश्यक है, जिससे उत्पादकता, स्थिरता और किसानों की आय में वृद्धि हो सके। उन्होंने बीएचयू द्वारा ऐसे आयोजनों के माध्यम से शोध संस्थानों और किसानों के बीच की दूरी कम करने के प्रयासों की सराहना की। प्रो.अमित पात्रा, निदेशक, आईआईटी (बीएचयू) ने कृषि के परिवर्तन में प्रौद्योगिकी और अंतःविषय सहयोग की बढ़ती भूमिका पर बल दिया। उन्होंने बताया कि तकनीकी नवाचार और संस्थानों के बीच शोध साझेदारी आधुनिक कृषि चुनौतियों का समाधान करने और उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण है। चंद्र शेखर सिंह(पद्मश्री), विशिष्ट अतिथि, ने प्रगतिशील खेती और जमीनी स्तर पर नवाचार से जुड़े अपने अनुभव और विचार साझा किए। उन्होंने किसानों को नई तकनीकों और पद्धतियों को अपनाने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान को भी संरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया, जिसने पीढ़ियों से कृषि को टिकाए रखा है। प्रो.उदय प्रताप सिंह, निदेशक, कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू के ने किसान मेलों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम वैज्ञानिकों और किसानों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजन आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत किस्मों और सतत कृषि पद्धतियों को किसानों तक पहुँचाने में सहायक होते हैं। इस कार्यक्रम में किसानों, वैज्ञानिकों, छात्रों और कृषि विशेषज्ञों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों और पद्धतियों को प्रदर्शित करने वाली चर्चाओं, प्रदर्शनों और प्रदर्शनी में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। कार्यक्रम का समापन किसान मेला 2026 के संयोजक प्रो. पी. के. सिंह द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, वैज्ञानिकों, किसानों और प्रतिभागियों के प्रति उनकी उपस्थिति और सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन समितियों, स्वयंसेवकों और मीडिया प्रतिनिधियों के योगदान को भी सराहा, जिनके प्रयासों से कार्यक्रम का सफल आयोजन संभव हो सका। उन्होंने किसानों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सहभागिता ही ऐसे आयोजनों को सार्थक और प्रभावी बनाती है। तथा सभी अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि विज्ञान और परंपरा के समन्वय से ही विकसित कृषि – समर्थ भारत का सपना साकार होगा। उद्घाटन सत्र के बाद एक तकनीकी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, मोटे अनाज (मिलेट) उत्पादन, पशुपालन प्रबंधन, बागवानी और किसानों के लिए सरकारी योजनाओं जैसे विषयों पर चर्चा की। कार्यक्रम का समापन किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवादात्मक प्रश्न-उत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसके बाद प्रगतिशील किसानों को पुरस्कार वितरण और सम्मानित किया गया। डॉ नरसिंह राम/ईएमएस/09/03/2026