ज़रा हटके
10-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। सुबह नींद से उठते ही अचानक चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छा जाना या कुछ क्षणों के लिए शरीर हल्का महसूस होना जैसी समस्या को लोग थकान, तनाव, कम नींद या कमजोरी समझकर हल्के में ले लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार ऐसा होना किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि ज्यादातर मामलों में सुबह चक्कर आना शरीर की पोजीशन के अचानक बदलने से जुड़ा होता है। लेटी हुई स्थिति से सीधे खड़े होते ही कुछ सेकंड के लिए दिमाग तक रक्त आपूर्ति कम हो जाती है, इसे ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है। ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन तब होता है जब लेटकर उठने पर ब्लड प्रेशर अचानक नीचे चला जाए। शरीर यदि इस बदलाव को तुरंत संतुलित नहीं कर पाता, तो चक्कर, कमजोरी या आंखों के आगे अंधेरा छाने जैसी दिक्कत महसूस होती है। यह समस्या अधिकतर बुजुर्गों, कम पानी पीने वालों और कुछ विशेष दवाइयों का सेवन करने वाले लोगों में तेजी से बढ़ती पाई जाती है। सुबह चक्कर आने के प्रमुख कारणों में डिहाइड्रेशन सबसे आम है। नींद के दौरान शरीर में पानी की मात्रा स्वाभाविक रूप से घट जाती है और यदि दिनभर पर्याप्त पानी न लिया गया हो तो सुबह ब्लड प्रेशर गिर सकता है। शराब और कैफीन शरीर को और डिहाइड्रेट कर देते हैं, जिससे यह समस्या और बढ़ जाती है। वहीं कुछ लोगों में लंबे समय तक खाली पेट रहने से लो ब्लड शुगर की समस्या उठ सकती है। विशेष रूप से डायबिटीज मरीजों में हाइपोग्लाइसीमिया के कारण चक्कर, घबराहट, पसीना और कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे में सुबह समय पर नाश्ता करना बेहद जरूरी है। कई दवाइयों के साइड इफेक्ट भी सुबह चक्कर आने का बड़ा कारण बन सकते हैं। ब्लड प्रेशर, नींद, मानसिक तनाव या दिल से जुड़ी दवाएं नसों और रक्त प्रवाह पर असर डालती हैं। यदि किसी दवा के बाद बार-बार चक्कर आएं, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। इसके अलावा स्लीप एपनिया यानी नींद के दौरान सांस रुकने की समस्या भी सुबह भारीपन और चक्कर का कारण बनती है। लंबे समय तक यह समस्या रहने पर शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है जिससे गंभीर स्वास्थ्य दिक्कतें उत्पन्न हो सकती हैं। कान के अंदरूनी हिस्से में संक्रमण, सूजन या संरचनात्मक बदलाव भी शरीर के संतुलन को प्रभावित करते हैं। ऐसे में उठते ही तेज चक्कर आ सकते हैं। इस समस्या से बचने के लिए अचानक खड़े होने से बचना, पर्याप्त पानी पीना, रात में शराब और कैफीन कम करना, नियमित नाश्ता करना और दवाइयों की उचित समीक्षा कराना उपयोगी साबित हो सकता है। साथ ही खून की कमी, माइग्रेन या कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी लगातार चक्कर आने का कारण बन सकती हैं, इसलिए लक्षण बढ़ने पर जांच कराना जरूरी है। सुदामा/ईएमएस 10 मार्च 2026