अंतर्राष्ट्रीय
10-Mar-2026
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यरुशलम,(ईएमएस)। आधुनिक युद्ध कौशल के क्षेत्र में इजराइल की ‘ब्लू स्पैरो’ मिसाइल इस वक्त दुनिया भर के सैन्य विशेषज्ञों और रणनीतिकारों के लिए चर्चा का केंद्र बनी हुई है। राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स द्वारा विकसित यह मिसाइल तकनीक इतनी उन्नत है कि यह दुनिया के सबसे मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम्स को भी नाकाम करने की क्षमता रखती है। हालिया सैन्य घटनाक्रमों में इस मिसाइल का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा गया है, जब अंतरिक्ष की ऊंचाइयों से गिरते हुए इसने अपने लक्ष्य को पूरी तरह राख में तब्दील कर दिया। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खूबी इसका वह मार्ग है, जो इसे रडार की पकड़ से बाहर रखता है। सामान्यतः मिसाइलें जमीन के समानांतर या एक निश्चित ऊंचाई पर उड़ान भरती हैं, जिन्हें रडार आसानी से ट्रैक कर लेते हैं। इसके विपरीत, ‘ब्लू स्पैरो’ लॉन्च होने के बाद सीधे एक्सो- एटमॉस्फेरिक फेज यानी अंतरिक्ष की दहलीज तक चली जाती है। इतनी अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण जमीन पर स्थित रडार इसे देख पाने में असमर्थ रहते हैं। दुनिया के अधिकांश एंटी-एयरक्राफ्ट रडार क्षितिज को स्कैन करते हैं और सामने से आने वाले खतरों को भांपते हैं, लेकिन ‘ब्लू स्पैरो’ अंतरिक्ष से 90 डिग्री के कोण पर सीधे नीचे गिरती है। रडार के ठीक ऊपर एक ‘ब्लाइंड स्पॉट’ होता है, जहां उसकी निगरानी क्षमता शून्य हो जाती है। जब तक दुश्मन के सिस्टम को खतरे का आभास होता है, तब तक यह मिसाइल लक्ष्य के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी होती है। इस मिसाइल की मारक क्षमता को इसकी हाइपरसोनिक रफ्तार और भी घातक बना देती है। जब यह अंतरिक्ष से नीचे की ओर आती है, तो गुरुत्वाकर्षण और इसके शक्तिशाली इंजन की संयुक्त ऊर्जा इसे ध्वनि की गति से कई गुना तेज रफ्तार प्रदान करती है। इतनी प्रचंड गति के कारण दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने का समय ही नहीं मिलता। करीब 1,900 किलो वजनी यह मिसाइल किसी उड़ते हुए ‘मौत के पहाड़’ की तरह व्यवहार करती है। इसे जमीन के बजाय ईगल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों से हवा में लॉन्च किया जाता है, जिससे पायलट दुश्मन की सीमा में प्रवेश किए बिना लगभग 2,000 किलोमीटर की सुरक्षित दूरी से सटीक निशाना साध सकता है। इस मिसाइल की सबसे विध्वंसक विशेषता इसकी ‘काइनेटिक एनर्जी’ है। इतनी ऊंचाई और रफ्तार से गिरने के कारण इसमें इतनी ऊर्जा पैदा होती है कि यह कंक्रीट की कई मीटर मोटी परतों को चीरकर पाताल जैसे गहरे अंडरग्राउंड बंकरों और सुरक्षित कमांड सेंटर्स को मलबे के ढेर में बदल देती है। यही कारण है कि यह मिसाइल वर्तमान में अभेद्य किलों और बंकरों के लिए काल मानी जा रही है। वीरेंद्र/ईएमएस 10 मार्च 2026