लेख
10-Mar-2026
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(11 मार्च धूम्रपान निषेध दिवस) हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को दुनिया भर में धूम्रपान के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को बीड़ी, सिगरेट की जानलेवा लत से बचाना और उन्हें एक स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। आज का दौर बेहद प्रतिस्पर्धात्मक है, जहाँ काम के बोझ और मानसिक तनाव के कारण लोग अक्सर नशे की शरण में चले जाते हैं। विशेषकर युवाओं के बीच धूम्रपान करना एक फैशन या दिखावे का जरिया बनता जा रहा है, जो कि गंभीर चिंता का विषय है। अक्सर दोस्त-यार के दबाव में आकर या केवल कौतूहलवश पहली बार सिगरेट को हाथ लगाया जाता है, लेकिन यह एक कश कब शरीर की मजबूरी बन जाता है, पता ही नहीं चलता। सिगरेट में मौजूद निकोटीन दिमाग को कुछ पल के लिए शांत करने का भ्रम पैदा करता है, जबकि वास्तविकता में यह शरीर के भीतर एक धीमा जहर घोलने का काम कर रहा होता है। मेडिकल साइंस के अनुसार, तम्बाकू के सेवन से फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा सबसे अधिक रहता है, क्योंकि इसका जहरीला धुआं सीधे साँस की नली में सूजन और संक्रमण पैदा करता है। केवल फेफड़े ही नहीं, बल्कि हृदय रोग, स्ट्रोक और उच्च रक्तचाप जैसी घातक बीमारियों के पीछे भी मुख्य कारण धूम्रपान ही पाया गया है। धूम्रपान का असर न केवल आंतरिक अंगों पर पड़ता है, बल्कि यह व्यक्ति की बाहरी सुंदरता और आत्मविश्वास को भी छीन लेता है। होंठों का काला पड़ना, दांतों का पीला होना और समय से पहले चेहरे पर झुर्रियां आना इसके स्पष्ट संकेत हैं। सबसे दुखद पहलू पैसिव स्मोकिंग है, जो उन निर्दोष लोगों को बीमार करती है जो खुद कभी धूम्रपान नहीं करते। जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान, कार्यालय या घर के भीतर सिगरेट पीता है, तो वह धुआं हवा में घुलकर आसपास के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की सांसों में जहर घोल देता है। घर के भीतर धूम्रपान करना अपने ही परिवार की सेहत के साथ खिलवाड़ करने जैसा है, जिससे बच्चों में अस्थमा और सांस की गंभीर बीमारियां पैदा हो सकती हैं। सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर कानूनी रोक लगाई है और विज्ञापनों के जरिए भी इसके खतरों को लगातार बताया जाता है, लेकिन असली बदलाव केवल कानून से नहीं, बल्कि व्यक्ति की अपनी मजबूत इच्छाशक्ति से ही संभव है। यदि आप सिगरेट की इस बेड़ी को तोड़ना चाहते हैं, तो सबसे पहले स्वयं से एक सच्चा वादा करें और इसे छोड़ने की एक निश्चित तारीख तय करें। अपने आस-पास से लाइटर, माचिस और एश-ट्रे जैसी चीजें हटा दें जो आपको लत की याद दिलाती हों। अपने परिवार और उन मित्रों को अपने इस फैसले के बारे में जरूर बताएं जो आपकी परवाह करते हैं, क्योंकि उनका मानसिक समर्थन इस कठिन सफर में आपकी सबसे बड़ी ताकत बनेगा। जब भी सिगरेट पीने की तीव्र तलब महसूस हो, तो तुरंत अपना ध्यान कहीं और लगाएं, खूब पानी पिएं या कोई फल खाएं। सौंफ, इलायची या अदरक के टुकड़े पास रखना तलब को कम करने में काफी मददगार साबित होता है। सुबह की सैर, हल्का व्यायाम और प्राणायाम फेफड़ों को नई शक्ति प्रदान करते हैं, जबकि ध्यान मानसिक तनाव को नियंत्रित करने में सहायक होता है। खाली समय में खुद को किसी रचनात्मक कार्य या अपनी पसंदीदा हॉबी में व्यस्त रखें ताकि सिगरेट का विचार मन में न आए। धूम्रपान छोड़ने का एक और बड़ा फायदा आर्थिक बचत है; एक पैकेट सिगरेट की कीमत साल भर में एक बड़ी राशि बन जाती है, जिसे आप बेहतर भविष्य या परिवार की खुशियों के लिए निवेश कर सकते हैं। अच्छी खबर यह है कि जैसे ही आप सिगरेट छोड़ते हैं, शरीर खुद को रिपेयर करना शुरू कर देता है। मात्र 24 घंटे के भीतर शरीर से कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस बाहर निकलने लगती है और हृदय गति सामान्य होने लगती है। कुछ ही हफ्तों में आपके स्वाद और सूंघने की शक्ति में सुधार आता है और एक साल बीतते-बीतते दिल की बीमारियों का खतरा आधा रह जाता है। हमारी हर सांस कीमती है और इसे धुएं में उड़ाना समझदारी नहीं है। आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम न केवल खुद तंबाकू से दूर रहेंगे, बल्कि अपने समाज को भी इस जहर के प्रति जागरूक करेंगे। एक नशामुक्त व्यक्ति ही एक ऊर्जावान, स्वस्थ और समृद्ध राष्ट्र की नींव रख सकता है। अपनी इच्छाशक्ति को पहचानें, धुएं के जाल को तोड़ें और एक लंबी व खुशहाल जिंदगी की ओर आज ही अपना पहला कदम बढ़ाएं। याद रखें, आपकी एक छोटी सी पहल न केवल आपकी उम्र बढ़ाएगी, बल्कि आपके अपनों के चेहरों पर मुस्कान भी लाएगी। (लेखक पत्रकार हैं ) ईएमएस / 10 मार्च 26