यूपीए की तुलना में बजट में भारी बढ़ोतरी, बाघों के संरक्षण में भारत ने रचा इतिहास इंदौर बना देश का पहला रामसर वेटलैंड सिटी, मध्य प्रदेश के गौरव पर सांसद ने जताया हर्ष नर्मदापुरम (ईएमएस)। राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया ने उच्च सदन में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के दौरान मोदी सरकार की नीतियों का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत केवल अपनी सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिस्थितिक कूटनीति (Ecological Diplomacy) के माध्यम से संपूर्ण विश्व को पर्यावरण संरक्षण की नई दिशा दिखा रहा है। बजटीय दूरदर्शिता और ठोस कार्ययोजना बताते हुए सदन को संबोधित करते हुए श्रीमती नारोलिया ने पिछले एक दशक में हुए क्रांतिकारी बदलावों के आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने तुलनात्मक विवरण देते हुए बताया कि वर्ष 2012-13 में जहाँ इस मंत्रालय का बजट मात्र ₹2,430 करोड़ था, वहीं 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर ₹3,759.46 करोड़ कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि केवल वित्तीय विस्तार नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है। मध्य प्रदेश का वैश्विक मान: इंदौर की उपलब्धि पर सांसद नारोलिया ने विशेष रूप से मध्य प्रदेश की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि 2014 में देश में केवल 26 रामसर स्थल (आर्द्रभूमि) थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 98 हो गई है। उन्होंने गर्व के साथ सदन को अवगत कराया कि वर्ष 2025 में इंदौर को भारत का पहला रामसर वेटलैंड सिटी नामित किया गया है, जो जलाशयों के संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर है। वन्यजीव और वनीकरण में विश्व गुरु की भूमिका निभाते हुए ग्लोबल फॉरेस्ट रिसोर्सेज असेसमेंट 2025 का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि शुद्ध वार्षिक वन क्षेत्र वृद्धि के मामले में भारत आज विश्व में तीसरे स्थान पर है। बाघों के संरक्षण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व के 75% जंगली बाघ अब भारत में सुरक्षित हैं, जिनकी संख्या 1,706 (2010) से बढ़कर अब 3,682 हो गई है। नर्मदापुरम और विकास का संतुलन बताते हुए गृह क्षेत्र नर्मदापुरम (होशंगाबाद) का उल्लेख करते हुए सांसद ने कहा कि माँ नर्मदा की गोद और सतपुड़ा के अंचलों में नगर वन योजना के माध्यम से पर्यटन और पर्यावरण के बीच एक स्वस्थ संतुलन स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ₹654 करोड़ के निवेश से देशभर में 620 शहरी वन विकसित किए जा रहे हैं, जिसका सीधा लाभ उनके संसदीय क्षेत्र जैसे वनाच्छादित अंचलों को मिल रहा है। प्रदूषण नियंत्रण और जनभागीदारी की दिशा में श्रीमती नारोलिया ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम और एक पेड़ माँ के नाम जैसे अभियानों की सफलता साझा की। उन्होंने बताया कि 2025 के अंत तक 262.4 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। साथ ही, मिशन LiFE के जरिए 6 करोड़ से अधिक लोग अपनी जीवनशैली को पर्यावरण के अनुकूल बना रहे हैं। अंत में, उन्होंने कचरा प्रबंधन और बायो ई3 नीति के माध्यम से 2030 तक 300 अरब डॉलर की जैव-अर्थव्यवस्था के लक्ष्य का पुरजोर समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त की। ईएमएस/राजीव अग्रवाल/ 10 मार्च 2026