क्षेत्रीय
10-Mar-2026
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बालाघाट (ईएमएस). बिहार के बोधगया स्थित पवित्र महाबोधि महाविहार को बौद्धों को सौंपने की मांग को लेकर मंगलवार को बालाघाट में बौद्ध अनुयायियों ने एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अंबेडकर चौक पर नारेबाजी करते हुए रैली निकाली और कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और बिहार सरकार के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें जल्द पूरी करने की गुहार लगाई। महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के बैनर तले मंगलवार को नगर के अंबेडकर चौक में बौद्ध अनुयायियों ने धरना दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में अनुयायियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद शाम को अंबेडकर चौक से रैली निकालकर एलआईसी चौक और डॉ. विश्वेश्वरैया चौक होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और बिहार सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर के प्रबंधन को लेकर 1949 में बने बीटीएमसी (बिहार टेंपल मैनेजमेंट कमेटी) एक्ट को समाप्त करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। उनका कहना है कि मंदिर का प्रबंधन पूरी तरह बौद्ध समुदाय को सौंपा जाना चाहिए, ताकि वहां बौद्ध परंपराओं और उपदेशों के अनुसार पूजा-पद्धति और संचालन हो सके। गैर बौद्धों के हाथों में है मंदिर का प्रबंधन प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वर्तमान में गैर-बौद्धों के हाथ में प्रबंधन होने के कारण मंदिर के स्वरूप और परंपराओं में बदलाव का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि देश के अन्य धार्मिक स्थलों का प्रबंधन उसी धर्म के अनुयायियों के हाथ में होता है, इसलिए महाबोधि महाविहार का प्रबंधन भी बौद्धों को ही सौंपा जाना चाहिए। फर्जी मुकदमों को वापस लें सरकार धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने बिहार सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन में शामिल बौद्ध अनुयायियों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने इन मुकदमों को वापस लेने और आंदोलनकारियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई बंद करने की मांग की। 135 वर्षों से चल रहा संघर्ष पूज्य भंते धम्म शिखर ने कहा कि महाबोधि महाविहार के अधिकार को लेकर बौद्ध समुदाय पिछले 135 वर्षों से संघर्ष जारी है। उनका कहना है कि जब देश के अन्य धार्मिक स्थलों का प्रबंधन संबंधित धर्म के लोगों के हाथ में है, तो महाबोधि महाविहार का प्रबंधन भी बौद्ध समुदाय को ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक्ट के तहत जो ट्रस्ट बना है, उसमें अन्य जाति के लोगों को हटाकर मंदिर का प्रबंधन केवल बौद्धों को दिया जाए। बोधगया का प्रबंधन गैर बौद्धों के हाथों में होने से भगवान तथागत बुद्ध के विचार और उनकी शिक्षा का प्रसार-प्रचार नहीं हो पा रहा है और देश सहित पूरे विश्व में भगवान बुद्ध को मानने वाले, इसको लेकर अपने-अपने तरह से विरोध दर्ज करा रहे है। उन्होंने कहा कि हम न्यायपालिका से न्याय चाहते है। मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा बड़ा आंदोलन महाबोधि महाविहार मुक्ति संघर्ष समिति के अध्यक्ष विकास खांडेकर और संयोजक रवि पटेल ने कहा कि देशभर में इस मुद्दे को लेकर आंदोलन किए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि महाबोधि महाविहार को बौद्धों को नहीं सौंपा गया तो आगे और बड़े आंदोलन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यहां आंदोलन तब तक चलेगा जब तक उन्हें बौद्धगया का अधिकार नहीं मिल जाता। भानेश साकुरे / 10 मार्च 2026