राष्ट्रीय
11-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। खून में शुगर का स्तर बहुत कम हो जाना भी खतरनाक हो सकता है। यह कहना है हैल्थ विशेषज्ञों का। उनके मुताबिक, जब शरीर में ग्लूकोज का स्तर 70 एमजी/डीएल से नीचे चला जाता है तो इसे लो ब्लड शुगर या हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है। यदि यह स्तर 40–50 एमजी/डीएल तक गिर जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है और तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है। ग्लूकोज शरीर और विशेष रूप से दिमाग के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है, इसलिए इसकी कमी का सीधा असर मानसिक और शारीरिक कार्यों पर पड़ता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि दिमाग को लगातार काम करने के लिए ग्लूकोज की जरूरत होती है। जब शरीर में शुगर का स्तर कम हो जाता है, तो दिमाग को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। इस दौरान व्यक्ति को चक्कर आना, भ्रम होना या कमजोरी महसूस होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में बेहोशी, दौरे पड़ना या दिमाग को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बढ़ जाता है। लो ब्लड शुगर के कुछ शुरुआती संकेत भी होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अचानक पसीना आना, हाथ कांपना, दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट, तेज भूख लगना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई इसके सामान्य लक्षण माने जाते हैं। कई बार आंखों के सामने धुंधलापन भी महसूस होता है। ये संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि शरीर में ग्लूकोज का स्तर गिर रहा है। यह समस्या खासतौर पर डायबिटीज के मरीजों में अधिक देखी जाती है, विशेषकर उन लोगों में जो इंसुलिन या शुगर कम करने वाली दवाएं लेते हैं। दवा लेने के बाद समय पर भोजन न करना, अत्यधिक व्यायाम करना या लंबे समय तक उपवास रखना शुगर के स्तर को अचानक गिरा सकता है। अनियमित खान-पान और अधिक मानसिक तनाव भी इस स्थिति को बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शुगर संतुलित रखने के लिए नियमित और संतुलित भोजन बेहद जरूरी है। लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें और हर दो से तीन घंटे में हल्का भोजन लें। संतुलित आहार, नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन करने से लो ब्लड शुगर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हाई शुगर जहां शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है, वहीं लो शुगर अचानक गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। यह कुछ ही मिनटों में व्यक्ति को बेहोश कर सकती है और समय पर उपचार न मिलने पर जान का खतरा भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत मीठा देना सबसे पहला उपाय माना जाता है। चीनी घोलकर पानी देना, ग्लूकोज पाउडर, मीठा जूस या टॉफी देना मददगार हो सकता है। करीब 15 मिनट बाद स्थिति दोबारा जांचनी चाहिए। यदि व्यक्ति बेहोश हो जाए तो मुंह में कुछ भी न डालें और तुरंत अस्पताल ले जाएं। सुदामा/ईएमएस 11 मार्च 2026