अंतर्राष्ट्रीय
11-Mar-2026


वाशिंगटन (ईएमएस)। संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव के बीच अमेरिका ने भारत को सीमित और अस्थायी रूप से रूसी तेल स्वीकार करने की अनुमति दी है। यह जानकारी व्हाइट हाऊस की प्रेस सचिव कोरोलिन केविट ने दी। लेविट ने बताया कि यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, अमेरिकी वित्त मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया। उनका कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों में वैश्विक तेल आपूर्ति में बने अस्थायी अंतर को भरने के लिए यह कदम उठाया गया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, ईरान संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा हुई है। इसके बाद में कई देशों के लिए तेल की नियमित आपूर्ति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने भारत को समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल को स्वीकार करने की अस्थायी अनुमति दी है। प्रेस सचिव ने कहा कि भारत ने इस मामले में जिम्मेदार रवैया दिखाया है। उन्होंने कहा कि पहले भी भारत ने प्रतिबंधों के चलते रूसी तेल की खरीद को सीमित करने के प्रयास किए थे। इसी को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने भारत के लिए यह अस्थायी व्यवस्था स्वीकार की है। लेविट के मुताबिक जिस रूसी तेल को स्वीकार करने की अनुमति मिली है, वह पहले से ही जहाजों पर लदा हुआ था और समुद्र के रास्ते अपने गंतव्य की ओर जा रहा था। इसलिए इस फैसले को एक विशेष परिस्थिति में लिया गया अस्थायी निर्णय माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ मिलने की संभावना नहीं है, क्योंकि यह तेल पहले ही व्यापारिक प्रक्रिया में शामिल हो चुका था। अमेरिका का मानना है कि इससे केवल मौजूदा आपूर्ति संकट को संभालने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में संभावित व्यवधान के बीच अमेरिका का यह फैसला वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने की दिशा में उठाया गया कदम हो सकता है। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में से एक है और उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना वैश्विक बाजार की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि यह अनुमति स्थायी नहीं है और केवल वर्तमान संकट की परिस्थितियों में एक अस्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय हालात और ऊर्जा बाजार की स्थिति के आधार पर अमेरिका अपनी नीति में बदलाव कर सकता है। आशीष दुबे / 11 मार्च 2026