वॉशिंगटन (ईएमएस)। साल 2024 में पहली बार देखा गया एस्टेरॉयड वायआर4 अंतरिक्ष चट्टान शुरू में वैज्ञानिकों के लिए चिंता का कारण बना था। शुरुआती गणनाओं में यह अनुमान लगाया गया कि 2032 में यह चांद के बेहद करीब से गुजर सकता है। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इसके टकराने की संभावना न के बराबर है, लेकिन फिर भी चर्चा शुरू हो गई थी क्योंकि अगर ऐसा होता, तो चांद की सतह पर बड़ा धमाका हो सकता था। हालांकि अब इस एस्टेरॉयड को लेकर पूरी कहानी बदल चुकी है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नासा ने अब साफ किया है कि 2024 वायआर4 चांद से टकराने वाला नहीं है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि नए, अधिक सटीक डेटा के आधार पर इसका रास्ता पहले के अनुमान से थोड़ा अलग है। इसका मतलब है कि यह 2032 में चांद के पास से गुजर जाएगा, लेकिन टकराएगा नहीं। वैज्ञानिक इसे ब्रह्मांड का एक बड़ा ‘यू-टर्न’ कह रहे हैं, क्योंकि पहले चर्चा में रहे खतरे की संभावना अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। एस्टेरॉयड 2024 वायआर4 का आकार लगभग 200 फीट यानी 60 मीटर बताया गया है। जब इसे पहली बार देखा गया, तब इसकी कक्षा पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। शुरुआती गणनाओं में दिसंबर 2032 में चांद के बेहद करीब से गुजरने की संभावना सामने आई थी, इसी कारण वैज्ञानिकों ने इस पर लगातार नजर रखी। बाद में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से प्राप्त नए डेटा ने इसकी कक्षा की अधिक सटीक जानकारी दी। इसके आधार पर नासा ने इसकी नई कक्षा की गणना की, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि यह एस्टेरॉयड चांद से करीब 13,200 मील यानी लगभग 21,200 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। इसका मतलब है कि चांद को कोई खतरा नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार अंतरिक्ष में ऐसे हजारों एस्टेरॉयड लगातार घूमते रहते हैं। इन्हें ‘नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट्स’ कहा जाता है, यानी वे पृथ्वी और उसके आसपास से गुजरने वाली अंतरिक्ष वस्तुएं हैं। इनमें से अधिकांश कभी भी पृथ्वी या चांद के लिए खतरा नहीं बनते। जब कोई नया एस्टेरॉयड खोजा जाता है, तो शुरुआत में उसके बारे में सीमित जानकारी होती है। समय के साथ और अधिक डेटा मिलने पर वैज्ञानिक उसकी कक्षा को सटीक रूप से समझ पाते हैं, और अक्सर शुरुआती आशंकाएं समाप्त हो जाती हैं, जैसा कि इस मामले में हुआ। इस खोज ने यह भी दिखाया कि अंतरिक्ष में लगातार निगरानी और वैज्ञानिक गणनाएं कितनी महत्वपूर्ण हैं। शुरुआती चिंताओं के बावजूद अब यह स्पष्ट है कि 2024 वायआर 4 न तो चांद को प्रभावित करेगा और न ही किसी बड़े खतरे का संकेत देता है। सुदामा/ईएमएस 12 मार्च 2026